स्तोत्र रत्नम – श्लोक 51 से 60 – सरल व्याख्या
श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः पूरी श्रृंखला << 41 -50 श्लोक 51 – आळवन्दार् कहते हैं “दयालु और दया पात्र के बीच का यह संबंध, आपकी ही दया से स्थापित किया गया था प्रभो, ऐसे होने के नाते, आपको ही, परित्याग किये बिना, मेरी रक्षा करना चाहिए” | तदहं त्वदृते न … Read more