आऴ्वार्/आचार्य वाऴि तिरुनामम् – सरल व्याख्या
श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नमः किसी भी प्रबंधम् के अध्ययन करते समय, हमें उसके ३ मुख्य लक्षणों को देखना चाहिए – वक्तृ वैलक्षण्यम् प्रबंध रचयिता की महानता, विशेष कौशल और गुणों को दर्शाता है। प्रबंध वैलक्षण्यम् उस साहित्यिक कार्य की महानता को दर्शाता है। विषय वैलक्षण्यम् विषय-वस्तु … Read more