तिरुवाय्मोऴि – सरल व्याख्या – ४.१ – ओरुनायगमाय्
श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः कोयिल् तिरुवाय्मोऴि << ३.३ तीन पुरुषार्थों (लक्ष्यों)—अर्थात ऐश्वर्य (सांसारिक सुख), कैवल्य (आत्मा का शाश्वत आनंद), और भगवद् कैंकर्य (भगवान की शाश्वत सेवा) में से, आऴ्वार् इस विषय पर प्रकाश डालते हैं कि ऐश्वर्य और कैवल्य जीवात्मा के वास्तविक स्वरूप के अनुकूल नहीं हैं और निकृष्ट … Read more