दिव्य प्रबंधम – सरल मार्गदर्शिका – भाग १०

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः  पूरी श्रृंखला << भाग ९ उपदेश रत्न माला उपदेश रत्न माला यह एक अद्भुत कृति है और नाम से ही हमें पता चलता है कि यह माला उपदेशों (निर्देश/शिक्षा) से बनाई गई है। इन उपदेशों की तुलना पन्ना (मरकत मणियों) और माणिक जैसे रत्नों (रत्नम्) से … Read more

दिव्यप्रबंधम् – सरल मार्गदर्शिका – भाग ९

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नमः पूरी श्रृंखला << भाग ८ हमारा श्रीवैष्णव संप्रदाय मुख्यतः रामानुज दर्शन के नाम से जाना जाता है और अत्यंत आदर के साथ स्मरण किया जाता है। हमारे आचार्य रामानुज की महानता का विस्तार से गुणगान इरामानुस नूट्रन्दादि में किया गया है। … Read more

दिव्यप्रबंधम् – सरल मार्गदर्शिका – भाग ८

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नमः पूरी श्रृंखला <<भाग ७ हम ने पूर्व में दिव्यप्रबंधम् का संक्षिप्त परिचय देखा और उसे कैसे प्राप्त किया इससे भी अवगत हैं। यह हमारे आचार्यों की कृपा है कि हम इस विषय से ज्ञात हो सके कि आऴ्वारों (द्रविड़ भाषा के … Read more

दिव्यप्रबन्धम् – सरल मार्गदर्शक – भाग ७

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः  पूरी श्रृंखला <<भाग ६ आऴ्वार् वे हैं जिन्हें “मयर्वऱ मदिनलम्” (कल्मष-रहित ज्ञान) के कारण दिव्य भक्ति का वरदान प्राप्त हुआ। ऎम्पॆरुमान् (भगवान) के साथ उनका उमड़ता हुआ अनुभव “दिव्यप्रबन्धम्” के रूप में प्रकट हुआ। “दिव्यप्रबन्धम्” वेदों का सार प्रस्तुत करता है। “दिव्यप्रबन्धम्” का उद्देश्य हमें … Read more

दिव्य प्रबंधम् – सरल मार्गदर्शिका – भाग ६

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः  पूरी श्रृंखला << भाग ५ हमने अब तक इयऱ्-पा के पहले चार प्रबन्धम् देखे हैं, अर्थात् मुदल् तिरुवंदादि, इरंडाम् तिरुवंदादि, मून्ऱाम तिरुवंदादि और नानमुगन् तिरुवंदादि। इयऱ्-पा के अगले प्रबन्धम् हैं: तिरुविरुत्तम्, तिरुवासिरियम् और पेरिय तिरुवंदादि, ये सभी श्री शठकोप स्वामी (नम्माऴ्वार्)  द्वारा रचित हैं। नम्माऴ्वार् … Read more

దివ్యప్రబంధ సరళ మార్గదర్శిని – పదవ భాగం (ఉపదేశ రత్తినమాలై, తిరువాయ్ మొళి నూత్తన్దాది)

శ్రీ: శ్రీమతే శఠకోపాయ నమః శ్రీమతే రామానుజాయ నమః శ్రీమత్ వరవరమునయే నమః పూర్తి వ్యాసమాలిక తొమ్మిదవ భాగం ఉపదేశరత్తినమాలై ఉపదేశరత్తినమాలై అనేది ఒక మహత్తరమైన గ్రంథం. దాని పేరుతోనే అర్థమవుతుంది – ఇది ఉపదేశాలతో (ఆధ్యాత్మిక బోధనలతో) నిర్మితమైన ఒక మాలిక/హారం. ఆ ఉపదేశాలు పచ్చలు, మాణిక్యాలు వంటి రత్నాలతో పోల్చబడ్డాయి. అందువల్ల దీనికి ఉపదేశరత్తినమాలై అనే పేరు ఏర్పడింది.ఉపదేశరత్తినమాలై అనేది శ్రీవచనభూషణం అనే రహస్య గ్రంథసారము. ఈ గ్రంథాన్ని స్వామి శ్రీ పిళ్ళైలోకాచార్యులు రచించారు. ఆయన … Read more

दिव्य प्रबंधम् – सरल मार्गदर्शिका – भाग ५

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः  पूरी श्रृंखला << भाग ४ दिव्य प्रबन्धम् को अरुळिच्चेयल भी कहा जाता है। प्रबन्धम् का अर्थ है — जो बाँधता है। आऴ्वारों के प्रबन्धम् में इतनी शक्ति होती है कि वे स्वयं भगवान (भगवान) को ही अडियार्गळों (भक्तों) से बाँध सकते हैं। ये प्रबन्धम् भक्तों … Read more

दिव्य प्रबंधम् – सरल मार्गदर्शिका – भाग ४

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः  पूरी श्रृंखला << भाग ३ इस लेख में, हम पेरिय तिरुमोऴि, तिरुक्कुऱुन्ताण्डगम् और तिरुनेडुन्ताण्डगम् के बारे में जानेंगे। हमने पिछले लेखों में निम्नलिखित महत्त्वपूर्ण अवधारणाओं को सम्मिलित किया: अब हम तिरुमङ्गै आऴ्वार् के कार्यों को देखेंगे| तिरुमङ्गै आऴ्वार् की कृतियाँ हैं: पेरिय तिरुमोऴि, तिरुक्कुऱुन्ताण्डगम् , … Read more

దివ్యప్రబంధ సరళ మార్గదర్శిని – తొమ్మిదవ భాగం (ఇరామానుశ నూట్రన్దాది)

పూర్తి వ్యాసమాలిక ఎనిమదవ భాగం శ్రీ: శ్రీమతే శఠకోపాయ నమః శ్రీమతే రామానుజాయ నమః శ్రీమత్ వరవరమునయే నమః మన  శ్రీవైష్ణవ సంప్రదాయం ప్రధానంగా రామానుజ దర్శనం అనే పేరుతో పిలవబడుతూ, ఆదరింపబడుతోంది. మన రామానుజాలవారి మహిమ ఇరామానుశ నూట్రన్దాదిలో విస్తృతంగా కీర్తింపబడింది. దీనిని పరమ కృపతో తిరువరంగత్తు అముదనార్ అనుగ్రహించారు. ముందుగా ఎమ్పెరుమానార్లను అంగీకరించక, కేవలం లోకాసక్తి వ్యాపారాలలో మాత్రమే ఉన్న తిరువారంగత్తు అముదనార్ ను, పెరియ పెరుమాళ్ భక్తునిగా మార్చినది రామానుజలవారి కృపే. అనంతరం, … Read more

దివ్యప్రబంధ సరళ మార్గదర్శిని – ఎనిమిదవ భాగం (తిరువాయి మొళి)

పూర్తి వ్యాసమాలిక ఏడవ భాగం శ్రీ: శ్రీమతే శఠకోపాయ నమః  శ్రీమతే రామానుజాయ నమః  శ్రీమత్ వరవరమునయే నమఃమనం దివ్యప్రబంధం అంటే ఏమిటో, మరియు అది మనకు ఎలా అందిందో చూశాము. మన ఆచార్యుల కృప ద్వారా, ఆళ్వారుల రచనలు దివ్యప్రబంధం అని మనకు తెలిసింది. మన ఆచార్యులు ఈ విషయాన్ని స్పష్టంగా వివరించారు – ఎంపెరుమాన్ దివ్య కృపతో సంసారం నుంచి ఒక ఆత్మ/జీవుడిని ఎంపిక చేసి, పాశురాలను (అరుళిచ్చేయల్) చెప్పించారు. అరుళిచ్చేయల్ అంటే ఏమిటి: … Read more