तिरुवायमोऴि — सरल व्याख्या — ५.७ – नोट्र 

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः कोयिल तिरुवायमोऴि << ५.५ यद्यपि साक्षात् सर्वेश्वर ‘एम्पॆरुमान्’ (भगवान) इतने कृपालु हैं कि वे उन जीवों की भी सहर्ष् रक्षा करते हैं जिनके भीतर उनके प्रति तनिक भी (लेशमात्र) अनुराग या जुड़ाव होता है; परंतु यहाँ आऴ्वार् (नम्माऴ्वार्) अत्यंत विरह और व्याकुलता में विस्मित हो रहे … Read more

आऴ्वार्/आचार्यों के वाऴि तिरुनामम् – मुनिवाहन स्वामी (तिरुप्पाणाऴ्वार्) – सरल व्याख्या

श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नमः पूरी श्रृंखला << पूर्व मुनिवाहन स्वामी (तिरुप्पाणाऴ्वार्) की महिमा  मुनिवाहन स्वामी (तिरुप्पाणाऴ्वार्) का अवतार उऱैयूर् नामक एक दिव्य क्षेत्र में हुआ था। आज यह स्थल तिरुक्कोऴि नाम से प्रसिद्ध है, जो श्रीरंगम् के निकट है। इस तीर्थक्षेत्र में महालक्ष्मी देवी स्वरूप कमलवल्ली … Read more

तिरुवायमोऴि – सरल व्याख्या – ५.५ ऎङ्गनेयो 

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः कोयिल तिरुवायमोऴि <<४.१० इस दिव्य दशक (दशक की भूमिका) को, श्री शठकोप् स्वामी (नम्माऴ्वार्/पराङ्कुश) ने स्वयं को ‘पराङ्कुश नायिका (पराङ्गुश नायकि)’ (परमात्मा के प्रेम में मग्न गोपी या नायिका) के विरह-भाव में स्थापित किया है। वे प्रभु के वियोग से दुखी होकर ‘मडल्’ (लोक-मर्यादा को … Read more

कोयिल् तिरुवाय्मॊऴि – सरल व्याख्या – ४.१० – ऒन्ऱुम्

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः कोयिल तिरुवायमोऴि << ४.१ यद्यपि सर्वेश्वर, जो स्वयं श्रियःपति (श्री महालक्ष्मी के दिव्य स्वामी) हैं, जीवात्माओं के प्रति अपनी परम करुणावश इस संसार में अर्चावतार् (विग्रह रूप) में अवतरित हुए और उन जीवात्माओं की प्रतीक्षा कर रहे हैं, तथापि ये जीवात्मा उनके द्वारा ही नियुक्त … Read more

तिरुवाय्मोऴि – सरल व्याख्या – ४.१ – ऒरुनायगमाय्

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः कोयिल् तिरुवाय्मोऴि << ३.३ तीन पुरुषार्थों (लक्ष्यों)—अर्थात ऐश्वर्य (सांसारिक सुख), कैवल्य (आत्मा का शाश्वत आनंद), और भगवद् कैंकर्य (भगवान की शाश्वत सेवा) में से, आऴ्वार् इस विषय पर प्रकाश डालते हैं कि ऐश्वर्य और कैवल्य जीवात्मा के वास्तविक स्वरूप के अनुकूल नहीं हैं और निकृष्ट … Read more

आऴ्वार्/आचार्यों के वाऴि तिरुनामम् – भक्ताङ्घ्रिरेणु (तॊण्डरडिप्पॊडि) आऴ्वार् – सरल व्याख्या

श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नमः पूरी श्रृंखला << पूर्व भक्ताङ्घ्रिरेणु आऴ्वार् की महिमा भक्ताङ्घ्रिरेणु सूरी का जन्म के समय नाम विप्र नारायणन था। उनका जन्म कुम्भकोणम् क्षेत्र के सुन्दर स्थान तिरुमण्डङ्गुड़ी में मार्गशीर्ष (तमिऴ् मास मार्गऴि) मास में, ज्येष्ठा (केट्टै) नक्षत्र में हुआ था। उन्होंने हमें दो … Read more

आऴ्वार्/आचार्यों के वाऴि तिरुनामम् – गोदाम्बा (आण्डाळ्) – सरल व्याख्या

श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नमः पूरी श्रृंखला << पूर्व गोदाम्बा (आण्डाळ्) की महिमाएँ श्री आण्डाळ् नाच्चियार् को कोदै नाच्चियार् (गोदाम्बा) के रूप में सम्मानित किया जाता है। वे श्रीविल्लिपुत्तूर् में विष्णुचित्त (पॆरियाऴ्वार्) की पुत्री के रूप में अवतीर्ण हुईं। वे भूमि देवी का अवतार हैं। उनका स्नेह … Read more

आऴ्वार्/आचार्य वाऴि तिरुनामम् – कुलशेखर आऴ्वार् – सरल व्याख्या

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः  श्रीमते रामानुजाय नमः  श्रीमत्‌ वरवरमुनये नमः पूरी श्रृंखला <<पूर्व कुलशेखर आऴ्वार् का जन्म तिरुवंजिक्कळम् में हुआ था, जो तिरुमूऴिक्कळम् के निकट स्थित एक केरळ दिव्यदेश है। उनका जन्म मासि (माघ) मास के पुनर्पूसम् (पुनर्वसु) नक्षत्र में हुआ। उनका जन्म भगवान श्रीराम के नक्षत्र पुनर्वसु में होने के कारण वे श्रीरामावतार में … Read more

आऴ्वार्/आचार्यों के वाऴि तिरुनामम् – विष्णुचित्त स्वामी – सरल व्याख्या

श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नमः पूरी श्रृंखला <<पूर्व विष्णुचित्त स्वामी (“पॆरियाऴ्वार्”) का जन्मस्थान श्रीविल्लिपुत्तूर् है। उन्होंने श्रीमन् नारायण के परत्व को स्थापित किया। मदुरै की राजसभा में, विष्णुचित्त स्वामी ने वेदों के अनेक वाक्यों को प्रस्तुत करके भगवान (ऎम्पॆरुमान्) श्रीमन् नारायण की परम श्रेष्ठता को सिद्ध किया। … Read more

आऴ्वार्/आचार्य वाऴि तिरुनामम् – मधुरकवि आऴ्वार् – सरल व्याख्या

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः  श्रीमते रामानुजाय नमः  श्रीमत्‌ वरवरमुनये नमः पूरी श्रृंखला << श्री शठकोप स्वामी (नम्माऴ्वार्)  मधुरकवि आऴ्वार् का वैभव  मधुरकवि आऴ्वार् का जन्म तिरुक्कोलूर दिव्य देशम् में हुआ, जो आऴ्वार् तिरुनगरी के निकट स्थित है। उनका जन्म चैत्र (चित्तिरै) मास में चित्रा (चित्तिरै) नक्षत्र के दिन हुआ था। उन्होंने ११ पासुरों का एक … Read more