नाच्चियार तिरुमोऴि – सरल व्याख्या​ – पहला तिरुमोऴि – तैयोरु तिङ्गळ्

श्रीः श्रीमतेशठकोपाय नमः श्रीमतेरामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः नाच्चियार् तिरुमोऴि << तनियन् आण्डाळ् ने तिरुप्पावै में  एम्पेरुमान् को उपाय माना और घोषित किया कि जो भगवान् के प्रति निःस्वार्थ कैंङ्कर्य ही उपेय है। यदि सदा यह विचार स्मरण में रहे तो एम्पेरुमान् स्वयं उसका फल देता है। परंतु एम्पेरुमान् तो न आण्डाळ् के समीप आया, न … Read more

उपदेश रत्तिनमालै – सरल व्याख्या – पासुर १९ – २०

। ।श्री: श्रीमते शठकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमत् वरवरमुनये नमः। । उपदेश रत्तिनमालै <<पासुर १६ – १८ पासुर १९ उन्नीसवां पासुर। मामुनिगळ् सभी आऴ्वारों के अरुळिच्चेयल् (सभी दिव्य स्तोत्रों का संग्रह) में से तिरुप्पल्लाण्डु की महानता को उदाहरण सहित समझाते हैं। कोदिलवाम् आऴ्वार्गळ् कूऱु कलैक्कॆल्लाम्आदि तिरुप्पल्लाण्डु आनदवुम् – वेदत्तुक्कुओम् ऎन्नुम् अदु पोल् उळ्ळदुक्कु ऎल्लाम् … Read more

सप्त गाथा (सप्त कादै)

श्री: श्रीमते शठकोप नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमद् वरवर मुनये नम: आर् वचनबूडनत्तिन् आऴ् पोरुळ् एल्लाम् अऱिवाऱ्*आरदु सोल् नेरिल् अनुट्टिप्पार् – ओर् ओरुवर्उण्डागिल्* अत्तनै काण् उळ्ळमे* एल्लार्क्कुम्अण्डाददन्ऱो अदु।। -उपदेश रत्नमाला ५५ जिस प्रकार मणवाळ मामुनिगळ् (श्रीवरवर मुनि स्वामीजी) ने उपदेश रत्नमाला में वर्णन किया है, हमारे श्रीवैष्णव सम्प्रदाय में सबसे महत्वपूर्ण ग्रन्थ पिळ्ळै लोकाचार्य द्वारा … Read more

उपदेश रत्तिनमालै – सरल व्याख्या – पासुर १६ – १८

। ।श्री: श्रीमते शठकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमत् वरवरमुनये नमः। । उपदेश रत्तिनमालै <<पासुर १४ और १५ पासुर १६ सोलहवां पासुर। इस पासुर के साथ आरंभ करते हुए अगले पाँच पासुरों में श्रीवरवरमुनि स्वामी, पेरियाऴ्वार् (विष्णुचित्त स्वामी) की श्रेष्ठता का वर्णन करते हैं जो अन्य आऴ्वारों से अधिक महान हैं।  इन्ऱैप् पॆरुमै अऱिन्दिलैयो एऴै … Read more

नाच्चियार् तिरुमोऴि – सरल व्याख्या – तनियन्

श्रीः श्रीमतेशठकोपाय नमः श्रीमतेरामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः नाच्चियार् तिरुमोऴि अल्लिनाळ् तामरै मेल् आरणंङ्गिन् इन्तुणैविमल्लि नाडाण्ड मडमयिल्- मेल्लियलाळ्आयर्कुल वेन्दन् आगत्ताळ् तेन्पुदुवैवेयर् पयन्द विळक्कु श्री गोदा मृदु स्वभाव की है; वह नव खिले कमल पुष्प में नित्य वास करने वाली, देवी पेरिय पिराट्टि की प्रिय सखी है, वह एक मोरनी की तरह तिरुमल्लि प्रदेश में राज्य करती … Read more

उपदेश रत्तिनमालै – सरल व्याख्या – पासुर १४ और १५

। ।श्री: श्रीमते शठकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमत् वरवरमुनये नमः। । उपदेश रत्तिनमालै <<पासुर १२ और १३ पासुर १४  चौदहवां पासुर। श्रीवरवरमुनि स्वामी वैकासी (वैशाख) मास के विसागम् (विशाखा) नक्षत्र के महान दिन का उत्सव मनाते हैं, जिस दिन नम्माऴ्वार्‌ (श्रीशठकोप स्वामी), जिन्होंने सरल तमिऴ् में वेद के अर्थों का वर्णन किया और जिनके … Read more

नाच्चियार् तिरुमोऴि – सरल व्याख्या

श्रीः श्रीमतेशठकोपाय नमः श्रीमतेरामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः मुदलायिरम् श्रीवरवरमुनि स्वामीजी ने श्रीगोदाजी की महानता को उपदेस रत्तिन मालै ग्रन्थ के २४ वे पाशुर मे सुन्दर्तापूर्वक उल्लेखित करते हैं। अञ्जु कुडिक्कु ओरु चन्ददियाय् आऴ्वार्गळ्तम् चेयलै विञ्जि निऱ्कुम तन्मैयळाय्- पिञ्जाय्प्प​ऴुत्ताळै आण्डाळैप् पत्तियुडन् नाळुम्व​ऴुत्ताय् मनमे मगिऴ्न्दु आऴ्वारों के कुल में श्रीगोदाजी (आण्डाळ्) एक ही उत्तराधिकारी बनकर अवतरित हुईं। … Read more

उपदेश रत्तिनमालै – सरल व्याख्या – पासुर १२ और १३

। ।श्री: श्रीमते शठकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमत् वरवरमुनये नमः। । उपदेश रत्तिनमालै <<पासुर १० और ११ पासुर १२ बारहवां पासुर। इसके बाद वे दयालु रूप से समझाते हैं ताकि संसार के सभी लोग उन तिरुमऴिसै आऴ्वार् (भक्तिसार स्वामी) की महानता के बारे में जान जाएँ, जिन्होंने तै (पौष) के महीने में मघम् (मघा) … Read more

उपदेश रत्तिनमालै – सरल व्याख्या – पासुर १० और ११

। ।श्री: श्रीमते शठकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमत् वरवरमुनये नमः। । उपदेश रत्तिनमालै <<पासुर ७ – ९ पासुर १०  क्योंकि रोहिणी नक्षत्र कार्तिक नक्षत्र के बाद आता है, इसलिए मामुनिगळ् संसार के लोगों को तिरुपाण् आऴ्वार् की महानता का निर्देश देते हैं, जो कार्तिक महीने के रोहिणी नक्षत्र में अवतीर्ण हुए। रोहिणी एक नक्षत्र … Read more

उपदेश रत्तिनमालै – सरल व्याख्या – पासुर ७ – ९

। ।श्री: श्रीमते शठकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमत् वरवरमुनये नमः। । उपदेश रत्तिनमालै <<पासुर ४ – ६ पासुर ७ सातवाँ पासुर समझाता है कि कैसे उनके ईश्वरीय नाम दुनिया में दृढ़ता से स्थापित किये गए, क्योंकि उन्होंने दुनिया को महानतम लाभ प्रदान किया।  मटृळ्ळ आऴ्वार्गळुक्कु मुन्ने वन्दुदित्तु नट्रमिऴाल् नूल् सेय्दु नाट्टै उय्त्त – पेट्रिमैयोर्एन्ऱु मुदलाऴ्वार्गळ् … Read more