नाच्चियार तिरुमोऴि – सरल व्याख्या – पहला तिरुमोऴि – तैयोरु तिङ्गळ्
श्रीः श्रीमतेशठकोपाय नमः श्रीमतेरामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः नाच्चियार् तिरुमोऴि << तनियन् आण्डाळ् ने तिरुप्पावै में एम्पेरुमान् को उपाय माना और घोषित किया कि जो भगवान् के प्रति निःस्वार्थ कैंङ्कर्य ही उपेय है। यदि सदा यह विचार स्मरण में रहे तो एम्पेरुमान् स्वयं उसका फल देता है। परंतु एम्पेरुमान् तो न आण्डाळ् के समीप आया, न … Read more