उपदेश रत्तिनमालै – सरल व्याख्या – पासुर १६ – १८
। ।श्री: श्रीमते शठकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमत् वरवरमुनये नमः। । उपदेश रत्तिनमालै <<पासुर १४ और १५ पासुर १६ सोलहवां पासुर। इस पासुर के साथ आरंभ करते हुए अगले पाँच पासुरों में श्रीवरवरमुनि स्वामी, पेरियाऴ्वार् (विष्णुचित्त स्वामी) की श्रेष्ठता का वर्णन करते हैं जो अन्य आऴ्वारों से अधिक महान हैं। इन्ऱैप् पॆरुमै अऱिन्दिलैयो एऴै … Read more