उपदेश रत्तिनमालै – सरल व्याख्या – पासुर ४ – ६

। ।श्री: श्रीमते शठकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमत् वरवरमुनये नमः। । उपदेश रत्तिनमालै << पासुर १ – ३ पासुर ४ चौथे पासुर में मामुनिगळ् ने, आऴ्वार् जिस क्रम में अवतरित हुए उस क्रम को बताया है। पॊय्गैयार् भूतत्तार् पेयार् पुगऴ् मऴिसैअय्यन् अरुळ् माऱन् सेरलर्कोन् – तुय्य भट्टनातन् अन्बर् ताळ् दूळि नऱ्-पाणन् नऱ्-कलियन्ईदिवर् तोट्रत्तु अडैवाम् … Read more

उपदेश रत्तिनमालै – सरल व्याख्या – पासुर १ – ३

। ।श्री: श्रीमते शठकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमत् वरवरमुनये नमः। । उपदेश रत्तिनमालै << तनियन् पासुर १ इस पासुर में मामुनिगळ् अपने आचार्य (शिक्षक) को प्रणाम करते हैं, और स्पष्ट रूप से इस ग्रंथ को दया पूर्वक रचने के अपने उद्देश्य को बताते हैं। ऎन्दै तिरुवाय्मॊऴि पिळ्ळै इन्नरुळाल् वन्दउपदेस मार्गत्तैच् चिन्दै सॆय्दुपिन्नवरुम् कऱ्-क उपदेसमाय् … Read more

उपदेश रत्तिनमालै – सरल व्याख्या – तनियन्

। ।श्री: श्रीमते शठकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमत् वरवरमुनये नमः। । उपदेश रत्तिनमालै मुन्नम् तिरुवाय्मोऴि पिळ्ळै ताम् उपदेसित्त  नेर तन्निन्पडियैत् तणवादसॊल् मणवाळमुनितन् अन्बुडन् सॆय् उपदेस रत्तिन मालै तन्नैतन्नॆञ्जु तन्निल् दरिप्पवर् ताळ्गळ् चरण् नमक्के॥ यह तनियन् (एक अकेली स्तुति/मंगळाचरण, जो ग्रंथ में एक अंतर्दृष्टि प्रदान करता है) कोयिल् कन्दाडै अण्णन् द्वारा दयालु रूप से रचित … Read more

उपदेश रत्तिनमालै – सरल व्याख्या

। ।श्री: श्रीमते शठकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमत् वरवरमुनये नमः। । अन्य प्रबंध उपदेश रत्तिनमालै   एक अद्भुत तमिऴ् ग्रंथ (दिव्य संरचना) है, जिसे दयापूर्वक हमारे श्रीवरवरमुनि स्वामी (मणवाळ  मामुनिगळ्) द्वारा रचित किया गया है, जो “विशधवाक शिखामणि” (एक प्रभावशाली वाणी, और मुकुट में जडे आभूषण के समान) हैं। यह एक अद्भुत रचना है … Read more

तिरुवाय्मोऴि नूट्रन्दादि (नूत्तन्दादि) – तनियन्

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमत् वरवरमुनये नमः पूरी श्रृंखला तनियन् १अल्लुम् पगलुम् अनुबविप्पार् तङ्गळुक्कुच्चॊल्लुम् पॊरुळुम् तॊगुत्तुरैत्तान् – नल्लमणवाळ मामुनिवन् माऱन् मऱैक्कुत्तणवा नूट्रन्तादि तान् जो लोग मीठे शब्दों और उनके अर्थों का आनंद लेने की इच्छा, निरंतर रात और दिन रखते हैं, उनके लिए मणवळ मामुनिगळ् ने दयापूर्वक, तमिळ् वेदं तिरुवाय्मोऴि के अर्थ … Read more

तिरुवाय्मोऴि नूट्रन्दाधि (नूत्तन्दादि) – सरल व्याख्या

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमत् वरवरमुनये नमः श्रीमन्नारायण ने नम्माऴ्वार् को उनके प्रति उत्तम ज्ञान और भक्ति का आशीर्वाद दिया। नम्माऴ्वार् की अपरिहार्य प्रवाह से तिरुविरुत्तम, तिरुवासिरियम, पेरिय तिरुवन्दादी और तिरुवाय्मोऴि नामक चार अद्भुत प्रबंध बन गए। इनमें से तिरुवाय्मोऴि को सामवेद का सार माना जाता है।तिरुवाय्मोऴि में उन सभी महत्वपूर्ण सिद्धांतों … Read more

तिरुवाय्मोळि – सरल व्याख्या – १.२ – वीडुमिन

श्री: श्रीमते शटकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमत् वरवरमुनये नम: कोयिल तिरुवाय्मोळि << १.१ भगवान के परत्व का परिपूर्ण अनुभव करने के बाद, इस दशक में आळ्वार, ऐसे भगवान को प्राप्त करने के उपाय का इन दस पासुरमों में समझा रहे हैं। इस बात के महत्व को समझते हुये, आळ्वार अपने दिव्य अनुभवों को, सभी … Read more

स्तोत्र रत्नम – श्लोक 21 से 30- सरल व्याख्या

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमत् वरवरमुनये नमः पूरी श्रृंखला << 11 -20 श्लोक 21 – श्री आळवन्दार् स्वामीजी, भगवान, जो कि हमारे शरण हैं, उनकी महानता का ध्यान करते हैं। जैसा की समझाया गया है – पहले लक्ष्य की प्रकृति की व्याख्या करने के बाद, यहां उस लक्ष्य का प्राप्त करने वाले … Read more

अमलनादिपिरान् – सरल व्याख्या

।।श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमत् वरवरमुनये नमः।। मुदलायीरम् श्री मणवाळ मामुनिगळ् स्वामीजी ने अपनी उपदेश रत्नमालै के दसवें पाशुर में अमलनादिपिरान् की महत्ता को बड़े ही सुन्दर ढंग से प्रस्तुत वर्णित किया है। कार्त्तिगैयिल् रोहिणि नाळ् काण्मिनिन्ऱु कासियिनीर्वाय्त्त पुगळ्प् पाणर् वन्दु उदिप्पाल् – आत्तियर्गळ्अन्बुडने तान् अमलन् आदिपिरान् कऱ्ऱदऱ् पिन्नन्गुडने कोण्डाडुम् नाळ्। अरे … Read more

तिरुवाय्मोळि – सरल व्याख्या – १.१ – उयर्वर

श्री: श्रीमते शटकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमत वरवरमुनये नम: कोयिल तिरुवाय्मोळि << तनियन सर्वेश्वर जो श्रिय:पति हैं सबसें सर्वश्रेष्ठ हैं, सारें कल्याण गुणों के निवास स्थान हैं, दिव्य रूप के हैं, श्रीवैकुण्ट और संसारम दोनों के नेता हैं, वेदों से प्रकाशित हैं, सर्वव्यापी हैं, सर्व नियन्ता हैं, सारें चेतनों औरअचित वस्तुओँ के अंतर्यामी हैं … Read more