उपदेश रत्तिनमालै – सरल व्याख्या – पासुर २३ – २४

।। श्री: श्रीमते शठकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमत् वरवरमुनये नमः ।। उपदेश रत्तिनमालै <<पासुर २१ – २२ पासुरम् २३ तेईसवां पासुरम्। वे अपने हृदय को बताते हैं कि तिरुवाडिप्पूरम् (आडि महीने का दिव्य नक्षत्र पूरम्) की क्या महानता है, जो आण्डाळ् के अवतार का दिन है और इसलिए अतुल्य है।  पॆरियाऴ्वार् पॆण् पिळ्ळैयाय् आण्डाळ् … Read more

उपदेश रत्तिनमालै – सरल व्याख्या – पासुर २१ – २२

।। श्री: श्रीमते शठकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमत् वरवरमुनये नमः ।। उपदेश रत्तिनमालै <<पासुरम् १९-२० पासुरम् २१ इक्कीसवां पासुर। आऴ्वारों की संख्या दस है। इनकी संख्या बारह भी मानी जाती है। यदि कोई उन आऴ्वारों को देखें जो केवल भगवान में संलग्न थे, तो उनकी संख्या दस है। हमने उपयुक्त पासुरों में देखा कि … Read more

उपदेश रत्तिनमालै – सरल व्याख्या – पासुर १९ – २०

। ।श्री: श्रीमते शठकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमत् वरवरमुनये नमः। । उपदेश रत्तिनमालै <<पासुर १६ – १८ पासुर १९ उन्नीसवां पासुर। मामुनिगळ् सभी आऴ्वारों के अरुळिच्चेयल् (सभी दिव्य स्तोत्रों का संग्रह) में से तिरुप्पल्लाण्डु की महानता को उदाहरण सहित समझाते हैं। कोदिलवाम् आऴ्वार्गळ् कूऱु कलैक्कॆल्लाम्आदि तिरुप्पल्लाण्डु आनदवुम् – वेदत्तुक्कुओम् ऎन्नुम् अदु पोल् उळ्ळदुक्कु ऎल्लाम् … Read more

उपदेश रत्तिनमालै – सरल व्याख्या – पासुर १६ – १८

। ।श्री: श्रीमते शठकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमत् वरवरमुनये नमः। । उपदेश रत्तिनमालै <<पासुर १४ और १५ पासुर १६ सोलहवां पासुर। इस पासुर के साथ आरंभ करते हुए अगले पाँच पासुरों में श्रीवरवरमुनि स्वामी, पेरियाऴ्वार् (विष्णुचित्त स्वामी) की श्रेष्ठता का वर्णन करते हैं जो अन्य आऴ्वारों से अधिक महान हैं।  इन्ऱैप् पॆरुमै अऱिन्दिलैयो एऴै … Read more

उपदेश रत्तिनमालै – सरल व्याख्या – पासुर १४ और १५

। ।श्री: श्रीमते शठकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमत् वरवरमुनये नमः। । उपदेश रत्तिनमालै <<पासुर १२ और १३ पासुर १४  चौदहवां पासुर। श्रीवरवरमुनि स्वामी वैकासी (वैशाख) मास के विसागम् (विशाखा) नक्षत्र के महान दिन का उत्सव मनाते हैं, जिस दिन नम्माऴ्वार्‌ (श्रीशठकोप स्वामी), जिन्होंने सरल तमिऴ् में वेद के अर्थों का वर्णन किया और जिनके … Read more

उपदेश रत्तिनमालै – सरल व्याख्या – पासुर १२ और १३

। ।श्री: श्रीमते शठकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमत् वरवरमुनये नमः। । उपदेश रत्तिनमालै <<पासुर १० और ११ पासुर १२ बारहवां पासुर। इसके बाद वे दयालु रूप से समझाते हैं ताकि संसार के सभी लोग उन तिरुमऴिसै आऴ्वार् (भक्तिसार स्वामी) की महानता के बारे में जान जाएँ, जिन्होंने तै (पौष) के महीने में मघम् (मघा) … Read more

उपदेश रत्तिनमालै – सरल व्याख्या – पासुर १० और ११

। ।श्री: श्रीमते शठकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमत् वरवरमुनये नमः। । उपदेश रत्तिनमालै <<पासुर ७ – ९ पासुर १०  क्योंकि रोहिणी नक्षत्र कार्तिक नक्षत्र के बाद आता है, इसलिए मामुनिगळ् संसार के लोगों को तिरुपाण् आऴ्वार् की महानता का निर्देश देते हैं, जो कार्तिक महीने के रोहिणी नक्षत्र में अवतीर्ण हुए। रोहिणी एक नक्षत्र … Read more

उपदेश रत्तिनमालै – सरल व्याख्या – पासुर ७ – ९

। ।श्री: श्रीमते शठकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमत् वरवरमुनये नमः। । उपदेश रत्तिनमालै <<पासुर ४ – ६ पासुर ७ सातवाँ पासुर समझाता है कि कैसे उनके ईश्वरीय नाम दुनिया में दृढ़ता से स्थापित किये गए, क्योंकि उन्होंने दुनिया को महानतम लाभ प्रदान किया।  मटृळ्ळ आऴ्वार्गळुक्कु मुन्ने वन्दुदित्तु नट्रमिऴाल् नूल् सेय्दु नाट्टै उय्त्त – पेट्रिमैयोर्एन्ऱु मुदलाऴ्वार्गळ् … Read more

उपदेश रत्तिनमालै – सरल व्याख्या – पासुर ४ – ६

। ।श्री: श्रीमते शठकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमत् वरवरमुनये नमः। । उपदेश रत्तिनमालै << पासुर १ – ३ पासुर ४ चौथे पासुर में मामुनिगळ् ने, आऴ्वार् जिस क्रम में अवतरित हुए उस क्रम को बताया है। पॊय्गैयार् भूतत्तार् पेयार् पुगऴ् मऴिसैअय्यन् अरुळ् माऱन् सेरलर्कोन् – तुय्य भट्टनातन् अन्बर् ताळ् दूळि नऱ्-पाणन् नऱ्-कलियन्ईदिवर् तोट्रत्तु अडैवाम् … Read more

उपदेश रत्तिनमालै – सरल व्याख्या – पासुर १ – ३

। ।श्री: श्रीमते शठकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमत् वरवरमुनये नमः। । उपदेश रत्तिनमालै << तनियन् पासुर १ इस पासुर में मामुनिगळ् अपने आचार्य (शिक्षक) को प्रणाम करते हैं, और स्पष्ट रूप से इस ग्रंथ को दया पूर्वक रचने के अपने उद्देश्य को बताते हैं। ऎन्दै तिरुवाय्मॊऴि पिळ्ळै इन्नरुळाल् वन्दउपदेस मार्गत्तैच् चिन्दै सॆय्दुपिन्नवरुम् कऱ्-क उपदेसमाय् … Read more