उपदेश रत्तिनमालै – सरल व्याख्या – पासुर १६ – १८

। ।श्री: श्रीमते शठकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमत् वरवरमुनये नमः। । उपदेश रत्तिनमालै <<पासुर १४ और १५ पासुर १६ सोलहवां पासुर। इस पासुर के साथ आरंभ करते हुए अगले पाँच पासुरों में श्रीवरवरमुनि स्वामी, पेरियाऴ्वार् (विष्णुचित्त स्वामी) की श्रेष्ठता का वर्णन करते हैं जो अन्य आऴ्वारों से अधिक महान हैं।  इन्ऱैप् पॆरुमै अऱिन्दिलैयो एऴै … Read more

उपदेश रत्तिनमालै – सरल व्याख्या – पासुर १४ और १५

। ।श्री: श्रीमते शठकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमत् वरवरमुनये नमः। । उपदेश रत्तिनमालै <<पासुर १२ और १३ पासुर १४  चौदहवां पासुर। श्रीवरवरमुनि स्वामी वैकासी (वैशाख) मास के विसागम् (विशाखा) नक्षत्र के महान दिन का उत्सव मनाते हैं, जिस दिन नम्माऴ्वार्‌ (श्रीशठकोप स्वामी), जिन्होंने सरल तमिऴ् में वेद के अर्थों का वर्णन किया और जिनके … Read more

उपदेश रत्तिनमालै – सरल व्याख्या – पासुर १२ और १३

। ।श्री: श्रीमते शठकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमत् वरवरमुनये नमः। । उपदेश रत्तिनमालै <<पासुर १० और ११ पासुर १२ बारहवां पासुर। इसके बाद वे दयालु रूप से समझाते हैं ताकि संसार के सभी लोग उन तिरुमऴिसै आऴ्वार् (भक्तिसार स्वामी) की महानता के बारे में जान जाएँ, जिन्होंने तै (पौष) के महीने में मघम् (मघा) … Read more

उपदेश रत्तिनमालै – सरल व्याख्या – पासुर १० और ११

। ।श्री: श्रीमते शठकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमत् वरवरमुनये नमः। । उपदेश रत्तिनमालै <<पासुर ७ – ९ पासुर १०  क्योंकि रोहिणी नक्षत्र कार्तिक नक्षत्र के बाद आता है, इसलिए मामुनिगळ् संसार के लोगों को तिरुपाण् आऴ्वार् की महानता का निर्देश देते हैं, जो कार्तिक महीने के रोहिणी नक्षत्र में अवतीर्ण हुए। रोहिणी एक नक्षत्र … Read more

उपदेश रत्तिनमालै – सरल व्याख्या – पासुर ७ – ९

। ।श्री: श्रीमते शठकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमत् वरवरमुनये नमः। । उपदेश रत्तिनमालै <<पासुर ४ – ६ पासुर ७ सातवाँ पासुर समझाता है कि कैसे उनके ईश्वरीय नाम दुनिया में दृढ़ता से स्थापित किये गए, क्योंकि उन्होंने दुनिया को महानतम लाभ प्रदान किया।  मटृळ्ळ आऴ्वार्गळुक्कु मुन्ने वन्दुदित्तु नट्रमिऴाल् नूल् सेय्दु नाट्टै उय्त्त – पेट्रिमैयोर्एन्ऱु मुदलाऴ्वार्गळ् … Read more

उपदेश रत्तिनमालै – सरल व्याख्या – पासुर ४ – ६

। ।श्री: श्रीमते शठकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमत् वरवरमुनये नमः। । उपदेश रत्तिनमालै << पासुर १ – ३ पासुर ४ चौथे पासुर में मामुनिगळ् ने, आऴ्वार् जिस क्रम में अवतरित हुए उस क्रम को बताया है। पॊय्गैयार् भूतत्तार् पेयार् पुगऴ् मऴिसैअय्यन् अरुळ् माऱन् सेरलर्कोन् – तुय्य भट्टनातन् अन्बर् ताळ् दूळि नऱ्-पाणन् नऱ्-कलियन्ईदिवर् तोट्रत्तु अडैवाम् … Read more

उपदेश रत्तिनमालै – सरल व्याख्या – पासुर १ – ३

। ।श्री: श्रीमते शठकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमत् वरवरमुनये नमः। । उपदेश रत्तिनमालै << तनियन् पासुर १ इस पासुर में मामुनिगळ् अपने आचार्य (शिक्षक) को प्रणाम करते हैं, और स्पष्ट रूप से इस ग्रंथ को दया पूर्वक रचने के अपने उद्देश्य को बताते हैं। ऎन्दै तिरुवाय्मॊऴि पिळ्ळै इन्नरुळाल् वन्दउपदेस मार्गत्तैच् चिन्दै सॆय्दुपिन्नवरुम् कऱ्-क उपदेसमाय् … Read more

उपदेश रत्तिनमालै – सरल व्याख्या – तनियन्

। ।श्री: श्रीमते शठकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमत् वरवरमुनये नमः। । उपदेश रत्तिनमालै मुन्नम् तिरुवाय्मोऴि पिळ्ळै ताम् उपदेसित्त  नेर तन्निन्पडियैत् तणवादसॊल् मणवाळमुनितन् अन्बुडन् सॆय् उपदेस रत्तिन मालै तन्नैतन्नॆञ्जु तन्निल् दरिप्पवर् ताळ्गळ् चरण् नमक्के॥ यह तनियन् (एक अकेली स्तुति/मंगळाचरण, जो ग्रंथ में एक अंतर्दृष्टि प्रदान करता है) कोयिल् कन्दाडै अण्णन् द्वारा दयालु रूप से रचित … Read more

उपदेश रत्तिनमालै – सरल व्याख्या

। ।श्री: श्रीमते शठकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमत् वरवरमुनये नमः। । अन्य प्रबंध उपदेश रत्तिनमालै   एक अद्भुत तमिऴ् ग्रंथ (दिव्य संरचना) है, जिसे दयापूर्वक हमारे श्रीवरवरमुनि स्वामी (मणवाळ  मामुनिगळ्) द्वारा रचित किया गया है, जो “विशधवाक शिखामणि” (एक प्रभावशाली वाणी, और मुकुट में जडे आभूषण के समान) हैं। यह एक अद्भुत रचना है … Read more

Glossary/Dictionary by pAsuram – upadhESa raththina mAlai

Sorted by word pAsuram Word Meaning upadhEsa raththina mAlai – 1 enthai my master upadhEsa raththina mAlai – 1 thiruvAimozhip piLLai that is, thiruvAimozhip piLLai upadhEsa raththina mAlai – 1 in(iya) aruLAl by his sweet/kind distinguished grace, upadhEsa raththina mAlai – 1 vandha what I got (from him) upadhEsa raththina mAlai – 1 upadhEsa mArkkaththai … Read more