प्रमेय सारं

श्रीः
श्रीमते शटकोपाय नमः
श्रीमते रामानुजाय नमः
श्रीमद्वरवरमुनय् नमः

मूल व्याख्यान: श्री वरवरमुनी स्वामीजी, तमिल अनुवाद: श्री . वे. वी. के. श्रीनिवासाचारी स्वामीजी.

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 arulalaperumalemperumanar-svptrश्री देवराज मुनि स्वामिजिश्रीविल्लिपुत्तूर्

mamunigal-vanamamalai-closeupश्री वरवरमुनि स्वामिजितोताद्रि

यह श्री देवराजमुनी स्वामीजी के ज्ञानसारम्-प्रमेयसारम् पर आधारित श्री वरवरमुनी स्वामीजी के व्याख्यान का हिन्दी भाषांतर है जो तमिल में श्री उभय वेदान्त विद्वान व्ही. के. श्रीनिवासाचारी ने लिखा है जो श्री देवराजमुनी स्वामीजी के वंशज हैं और श्रीविल्लीपुत्तुर में बिराजते हैं।

कीर्ती मूर्ति श्री श्रीनिवासाचारी स्वामीजी ३१ वे पट्टम् श्री उभय वेदान्त विद्वान श्री तिरुमलै विंजीमूर कुप्पन ऐयंगार (श्री कुप्पुस्वामी ताताचार) स्वामीजी के कुमार हैं।

श्री श्रीनिवासाचारी स्वामीजी निर्मित तमिल ग्रंथ २००३ पांगुनी-उत्तीरादी में श्री उ. वे. कुप्पुस्वामी ताताचार स्वामीजी के १०० वे नक्षत्र उत्सव पर प्रकाशित हुआ था।

मूल तमिल ग्रंथ और उसके अङ्ग्रेज़ी तथा इतर भाषाओंके रूपांतरित ग्रंथोंका प्रचार श्री . वे. श्रीनिवासाचारी स्वामीजी के कुमार विद्वान श्री . वे. वेंकटाचारी स्वामीजी (जो ३३ वे पट्टम् को सुशोभित कर रहे हैं) के अनुमति से हो रहा है। श्री . वे. वेंकटाचारी स्वामीजी श्रीविल्लीपुत्तूर मठ में बिराजते हैं और श्री कुप्पन एयङ्गार मंडप श्री विल्लीपुत्तुर में श्री श्रीनिवास सन्निधि तथा श्री देवराजमुनी सन्निधि में नित्य कैंकर्य करते हैं।

हिंदी अनुवाद – केशव रान्दाद रामानुजदास

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