आर्ति प्रबंधं – ५५
श्री: श्रीमते शठकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमद्वरवरमुनये नम: आर्ति प्रबंधं << पाशुर ५४ उपक्षेप एक सच्चे शिष्य और अटल सेवक को दो विषयों की ज्ञान होनी चाहिए १) उस्के लाभार्थ मात्र आचार्य ने कृपा से किये सारे विषय २) भविष्य में आचार्य से मिलने वाली विषयों में दिलचस्पी इन दोनों में से पहले … Read more