ज्ञान सारं – पासुर (श्लोक) १२
श्री: श्रीमते शठकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमत् वरवरमुनये नम: ज्ञान सारं ज्ञान सारं – पासुर (श्लोक) ११ ज्ञान सारं – पासुर (श्लोक) १३ पासुर (१२) माराय् इनैन्द मरुदम् इरत्तवऴ्न्द सेराररविन्दस्च सेवडियै – वेराग उळ्ळादार ओण्निधियै तन्तिडिणुम् तान् उवन्दु कोळ्ळान् मलर् मडन्दै कोन् शब्दार्थ – मलर्मडन्दै कोन् – भगवान श्रीमन्नारायण पद्म (कमल) मे रहने वालि … Read more