आर्ति प्रबंधं – १०
श्री: श्रीमते शठकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमद्वरवरमुनये नम: आर्ति प्रबंधं << पासुर ९ उपक्षेप अपने अनेक जन्म मरणो के कारण पर मणवाळ मामुनि विचार करते हैं और इस निर्णय पर पहुँचते हैं कि उनके अनेक जन्मों और उससे सम्बंधित पीड़ाओं का एक मात्र कारण, श्री रामानुज के चरण कमलों में शरणागति न करना ही है। … Read more