उपदेश रत्तिनमालै – सरल व्याख्या – पासुरम् ६७ – ६९
। ।श्री: श्रीमते शठकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमत् वरवरमुनये नमः। । उपदेश रत्तिनमालै << पासुरम् ६६ पासुरम् ६७ सड़सठवां पासुरम्। श्रीवरवरमुनि स्वामीजी अपने हृदय को कुछ इस प्रकार उत्तर दे रहे हैं, मानो वह उनसे पूछ रहा हो, “तुम कह रहे हो कि हमें ऐसा जीना चाहिए जैसे कि आचार्य ही सब कुछ हैं, जबकि … Read more