प्रमेय सारं

श्रीः श्रीमते शटकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनय् नमः मूल व्याख्यान: श्री वरवरमुनी स्वामीजी, तमिल अनुवाद: श्री उ. वे. वी. के. श्रीनिवासाचारी स्वामीजी. e-book: https://1drv.ms/b/s!AiNzc-LF3uwygwzixn4PT17uANyK  श्री देवराज मुनि स्वामिजि – श्रीविल्लिपुत्तूर् श्री वरवरमुनि स्वामिजि – तोताद्रि यह श्री देवराजमुनी स्वामीजी के ज्ञानसारम्-प्रमेयसारम् पर आधारित श्री वरवरमुनी स्वामीजी के व्याख्यान का हिन्दी भाषांतर है जो तमिल … Read more

ज्ञान सारं – पासुर (श्लोक) ४०

श्री: श्रीमते शठकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमत् वरवरमुनये नम: ज्ञान सारं ज्ञान सारं – पासुर (श्लोक) ३९  पाशुर ४०: अल्लि मलर पावैक्कन्बर अडिक्कन्बर सोल्लुम अविडु सुरुदियाम – नल्ल पड़ियाम मनु नूर कवर सरिदै पार्वै सेडियार विनैत तोगैक्कुत ती प्रस्तावना: “आचार्य भक्ति” और “भक्तों के भक्त” के विचार को पिछले कई पाशुरों में विस्तार से बताया … Read more

ज्ञान सारं – पासुर (श्लोक) ३९

श्री: श्रीमते शठकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमत् वरवरमुनये नम: ज्ञान सारं ज्ञान सारं – पासुर (श्लोक) ३८                                                            ज्ञान सारं – पासुर (श्लोक) ४० पाशुर-३९   अलगै मुलै सुवैत्तार्क्कु अंबर अडिक्कन्बर तिलदम एनत तिरिवार तम्मै – उलगर पलि तूट्रिल तुदियागुम तूटादवर इवरै पोट्रिल अदु पुन्मैये याम प्रस्तावना: पिछले पाशुर में आचार्य कि महिमा के बारे में विस्तार से … Read more

ज्ञान सारं – पासुर (श्लोक) ३८

श्री: श्रीमते शठकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमत् वरवरमुनये नम: ज्ञान सारं ज्ञान सारं – पासुर (श्लोक) ३७                                                             ज्ञान सारं – पासुर (श्लोक) ३९ पाशुर-३८ तेनार कमलत् तिरुमामगल कोलुनन ताने गुरुवागित तन अरूलाल – मानिडर्क्का इन्निलत्ते तो न्रु दलाल यार्क्कुम अवन तालिणैयै उन्नुवदे साल उरुम प्रस्तावना: “आचार्य कि कीर्ति और महत्व” का मनोभाव २६वें पाशुर (तप्पिल गुरू … Read more

ज्ञान सारं – पासुर (श्लोक) ३७

श्री: श्रीमते शठकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमत् वरवरमुनये नम: ज्ञान सारं ज्ञान सारं – पासुर (श्लोक) ३६                                                             ज्ञान सारं – पासुर (श्लोक) ३८ पाशुर-३७ पोरूलुम उयिरूम उडम्बुम पुगलुम तेरूलुम गुणमुम सेयलुम – अरुल पुरिन्द तन आरियन पोरूट्टाच सङ्गर पम सेय्बवर नेञ्जु एन्नालुम मालुक्किडम प्रस्तावना: इस पाशुर में श्री देवराजमुनि स्वामीजी यह कहते हैं कि भगवान श्रीमन्नारायण … Read more

ज्ञान सारं – पासुर (श्लोक) ३६

श्री: श्रीमते शठकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमत् वरवरमुनये नम: ज्ञान सारं ज्ञान सारं – पासुर (श्लोक) ३५                                                             ज्ञान सारं – पासुर (श्लोक) ३७ पाशुर-३६ विल्लार मणि कोलिक्कुम वेंकटा पोर कुंरु मुदल सोल्लार पोलिल सूल तिरुप्पदिगल – एल्लाम मरुलाम इरूलोड मत्तगत्तुत तन ताल अरूलालै वैत्त अवर प्रस्तावना: एक शिष्य जो अपने आचार्य के शरण हो गया उसके … Read more

ज्ञान सारं – पासुर (श्लोक) ३५

श्री: श्रीमते शठकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमत् वरवरमुनये नम: ज्ञान सारं ज्ञान सारं – पासुर (श्लोक) ३४                                                             ज्ञान सारं – पासुर (श्लोक) ३६ पाशुर-३५: एन्रुम अनैत्तुयिर्क्कुम ईरञ्सेय नारणनुम अन्रुम तन आरियन पाल अन्बोलियिल – निन्र पुनल पिरिन्द पङ्गयत्तैप पोङ्गु सुडर वेय्योन अनल उमिलन्दु तान उलर्त्तियट्रु प्रस्तावना: आखरि दो पाशुर में स्वामीजी श्री देवराज मुनि लोगों … Read more

ज्ञान सारं – पासुर (श्लोक) ३४

श्री: श्रीमते शठकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमत् वरवरमुनये नम: ज्ञान सारं ज्ञान सारं – पासुर (श्लोक) ३३                                                            ज्ञान सारं – पासुर (श्लोक) ३५ पाशुर-३४ पट्रु गुरूवैप परन अन्रेन इगलन्दु मट्रोर परनै वलिप्पडुदल – एट्रे तन कैप्पोरूल विट्टारे नुम आसिनियिल ताम पुदैत्त अप्पोरूल तेडित तिरिवानट्रू प्रस्तावना: हर शिष्य को उसके आचार्य उसके लिये बहुत ही सुलभता से … Read more

ज्ञान सारं – पासुर (श्लोक) ३३

श्री: श्रीमते शठकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमत् वरवरमुनये नम: ज्ञान सारं ज्ञान सारं – पासुर (श्लोक) ३२                                                            ज्ञान सारं – पासुर (श्लोक) ३४ पाशुर-३३ एट्ट इरुन्द गुरुवै इवै अन्रेन्रु विट्टोर परनै विरुप्पुरुदल – पोट्टनेत्तन कण सेम्पलित्तिरुन्दु कैत्तुरुत्ति नीर तूवि अम्पुदत्तैप पार्त्तिरुप्पानट्रु प्रस्तावना: इस पाशुर में यह समझाया गया है की कैसे एक व्यक्ति बुद्धिहीन है जो … Read more

ज्ञान सारं – पासुर (श्लोक) ३२

श्री: श्रीमते शठकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमत् वरवरमुनये नम: ज्ञान सारं ज्ञान सारं – पासुर (श्लोक) ३१                                                            ज्ञान सारं – पासुर (श्लोक) ३३ पाशुर-३२ मानिडवन एन्रुम गुरुवै मलर मगल कोन तान उगन्द कोलम उलोगम एन्रुम – ईनमदा एण्णुगिन्रु नीसर इरुवरुमे एक्कालुम नण्णिडुवर कीलाम नरगु ३०वें पाशुर में (माडुम मनैयुम), श्रीदेवराज मुनि स्वामीजी उस विधी विधान शास्त्र … Read more