आर्ति प्रबंधं – २०

श्री:  श्रीमते शठकोपाय नम:  श्रीमते रामानुजाय नम:  श्रीमद्वरवरमुनये नम: आर्ति प्रबंधं << पासुर १९ उपक्षेप पिछले पासुरम में मणवाळ मामुनिगळ श्री रामानुज से पूँछते हैं कि क्या ज्ञानी अपने पुत्रों के पथभ्रष्ट होना सह पायेंगें।  (इरामानुस नूट्रन्दादि ४४ ) “नल्लार परवुम इरामानुसन” अनुसार श्री रामानुज , जो नेक लोगों के मान्यवर हैं, मणवाळ मामुनि के शोक … Read more

आर्ति प्रबंधं – १९

श्री:  श्रीमते शठकोपाय नम:  श्रीमते रामानुजाय नम:  श्रीमद्वरवरमुनये नम: आर्ति प्रबंधं << पासुर १७ उपक्षेप पिछले पासुरम में मणवाळ मामुनि श्री रामानुज से, इस साँसारिक लोक के नित्य अंधकार और अज्ञान में फॅसे , खुद केलिए रोशनी दिखाने की प्रार्थना करते हैं। इस पासुरम में वे बताते हैं कि वे अपने शरीर के वश में हैं … Read more

आर्ति प्रबंधं – १७

श्री:  श्रीमते शठकोपाय नम:  श्रीमते रामानुजाय नम:  श्रीमद्वरवरमुनये नम: आर्ति प्रबंधं << पासुर १८ उपक्षेप पिछले पासुरम में मणवाळ मामुनि श्री रामानुज से, उन्के चरण कमल प्राप्त होने  की समय की विवरण प्रार्थना किये।  अब मामुनि के अभिप्राय है कि ,इस प्रश्न से  श्री रामानुज के मन में एक सोच पैदा हुआ हैं। वह है , … Read more

शरणागति गद्य – चूर्णिका 5 – भाग 4

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नम: शरणागति गद्य << चूर्णिका 5 – भाग 3 आईये अब हम उन अष्ट गुणों और अन्य कल्याण गुणों के विषय में जानने का प्रयास करेंगे है, जिनका वर्णन भगवद श्रीरामानुज स्वामीजी, भगवान की शरणागति करने के पूर्व करते है। सत्यकाम !सत्यसंकल्प ! परब्रह्मभूत ! पुरुषोत्तम ! महाविभूते ! श्रीमन् ! नारायण … Read more

आर्ति प्रबंधं – १८

श्री:  श्रीमते शठकोपाय नम:  श्रीमते रामानुजाय नम:  श्रीमद्वरवरमुनये नम: आर्ति प्रबंधं << पासुर १६ उपक्षेप श्री रामानुज ने आश्वासन दिया था कि मणवाळ मामुनि के परमपद प्राप्ति के इच्छा वे पूर्ती करेंगें।  किन्तु (तिरुवाय्मोळि ९.९.६ ) के “अवन अरुळ पेरुम अळवाविनिल्लादु” के जैसे मामुनि उचित काल तक प्रतीक्षा करने केलिए तैयार नहीं हैं। तिरुवाय्मोळि ५.३ में … Read more

आर्ति प्रबंधं – १६

श्री:  श्रीमते शठकोपाय नम:  श्रीमते रामानुजाय नम:  श्रीमद्वरवरमुनये नम: आर्ति प्रबंधं << पासुर १५ गूँगे को अपने चरण कमलों को दिखा कर, श्री रामानुज आशीर्वाद करते हैं उपक्षेप पिछले पासुरम में मणवाळ मामुनि निश्चय करतें हैं कि श्री रामानुज के प्रति उनके ह्रदय में एक बिन्दुमात्र भी प्रेम या भक्ति नहीं हैं। इस पासुरम में उनके … Read more

आर्ति प्रबंधं – १५

श्री:  श्रीमते शठकोपाय नम:  श्रीमते रामानुजाय नम:  श्रीमद्वरवरमुनये नम: आर्ति प्रबंधं << पासुर १४ उपक्षेप मणवाळ मामुनि के अभिप्राय हैं कि वे अपने  बुरे स्थिति के लिए श्री रामानुज को दोषित मानते हैं और इस स्थिति से मुक्ति केलिए प्रार्थना उन्ही से करते हैं। मणवाळ मामुनि विचार करते हैं कि ,(रामानुस नूट्रन्दादि ९१ ) के “इरामानुसन … Read more

आर्ति प्रबंधं – १४

श्री:  श्रीमते शठकोपाय नम:  श्रीमते रामानुजाय नम:  श्रीमद्वरवरमुनये नम: आर्ति प्रबंधं << पासुर १३ उपक्षेप यह पासुरम १२ वे पासुरम से जुड़ा हुआ है। पासुरम १२ एक विषयांतकरण था (प्रासंगिकम )। १२वे पासुरम में श्री रामानुज मणवाळ मामुनि से पूछते हैं, “हे ! मणवाळ मामुनि ! आपके आचार्य के आदेश पर आप मेरे चरणों में शरणागति … Read more

आर्ति प्रबंधं – १३

श्री:  श्रीमते शठकोपाय नम:  श्रीमते रामानुजाय नम:  श्रीमद्वरवरमुनये नम: आर्ति प्रबंधं << पासुर १२ उपक्षेप अब तक  मणवाळ मामुनिगळ श्री रामानुज से कई विषयों की प्रार्थना किये।  श्री रामानुज की सौलभ्यता ऐसा हैं कि वे इन सारे प्रार्थनाओँ को सच्चा बनाएं।  इस पासुरम में मामुनि  श्री रामानुज के सौंदर्य रूप की गुण गाते हैं। इससे बढ़कर … Read more

आर्ति प्रबंधं – १२

श्री:  श्रीमते शठकोपाय नम:  श्रीमते रामानुजाय नम:  श्रीमद्वरवरमुनये नम: आर्ति प्रबंधं << पासुर ११ एम्पेरुमानार – तिरुवाइमोळिप्पिळ्ळै – मणवाळमामुनिगळ उपक्षेप पिछले पासुरम में, मणवाळ मामुनि, श्री रामानुज से वडुग नम्बि के स्थिति अनुग्रह करने की प्रार्थना करते हैं।  श्री रामानुज उनसे प्रश्न किये कि, “हे ! मणवाळ मामुनि ! आप  वडुग नम्बि के स्थिति अनुदान करने … Read more