आर्ति प्रबंधं – १९

श्री:  श्रीमते शठकोपाय नम:  श्रीमते रामानुजाय नम:  श्रीमद्वरवरमुनये नम: आर्ति प्रबंधं << पासुर १७ उपक्षेप पिछले पासुरम में मणवाळ मामुनि श्री रामानुज से, इस साँसारिक लोक के नित्य अंधकार और अज्ञान में फॅसे , खुद केलिए रोशनी दिखाने की प्रार्थना करते हैं। इस पासुरम में वे बताते हैं कि वे अपने शरीर के वश में हैं … Read more

आर्ति प्रबंधं – १७

श्री:  श्रीमते शठकोपाय नम:  श्रीमते रामानुजाय नम:  श्रीमद्वरवरमुनये नम: आर्ति प्रबंधं << पासुर १८ उपक्षेप पिछले पासुरम में मणवाळ मामुनि श्री रामानुज से, उन्के चरण कमल प्राप्त होने  की समय की विवरण प्रार्थना किये।  अब मामुनि के अभिप्राय है कि ,इस प्रश्न से  श्री रामानुज के मन में एक सोच पैदा हुआ हैं। वह है , … Read more

शरणागति गद्य – चूर्णिका 5 – भाग 4

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नम: शरणागति गद्य << चूर्णिका 5 – भाग 3 आईये अब हम उन अष्ट गुणों और अन्य कल्याण गुणों के विषय में जानने का प्रयास करेंगे है, जिनका वर्णन भगवद श्रीरामानुज स्वामीजी, भगवान की शरणागति करने के पूर्व करते है। सत्यकाम !सत्यसंकल्प ! परब्रह्मभूत ! पुरुषोत्तम ! महाविभूते ! श्रीमन् ! नारायण … Read more

आर्ति प्रबंधं – १८

श्री:  श्रीमते शठकोपाय नम:  श्रीमते रामानुजाय नम:  श्रीमद्वरवरमुनये नम: आर्ति प्रबंधं << पासुर १६ उपक्षेप श्री रामानुज ने आश्वासन दिया था कि मणवाळ मामुनि के परमपद प्राप्ति के इच्छा वे पूर्ती करेंगें।  किन्तु (तिरुवाय्मोळि ९.९.६ ) के “अवन अरुळ पेरुम अळवाविनिल्लादु” के जैसे मामुनि उचित काल तक प्रतीक्षा करने केलिए तैयार नहीं हैं। तिरुवाय्मोळि ५.३ में … Read more

आर्ति प्रबंधं – १६

श्री:  श्रीमते शठकोपाय नम:  श्रीमते रामानुजाय नम:  श्रीमद्वरवरमुनये नम: आर्ति प्रबंधं << पासुर १५ गूँगे को अपने चरण कमलों को दिखा कर, श्री रामानुज आशीर्वाद करते हैं उपक्षेप पिछले पासुरम में मणवाळ मामुनि निश्चय करतें हैं कि श्री रामानुज के प्रति उनके ह्रदय में एक बिन्दुमात्र भी प्रेम या भक्ति नहीं हैं। इस पासुरम में उनके … Read more

आर्ति प्रबंधं – १५

श्री:  श्रीमते शठकोपाय नम:  श्रीमते रामानुजाय नम:  श्रीमद्वरवरमुनये नम: आर्ति प्रबंधं << पासुर १४ उपक्षेप मणवाळ मामुनि के अभिप्राय हैं कि वे अपने  बुरे स्थिति के लिए श्री रामानुज को दोषित मानते हैं और इस स्थिति से मुक्ति केलिए प्रार्थना उन्ही से करते हैं। मणवाळ मामुनि विचार करते हैं कि ,(रामानुस नूट्रन्दादि ९१ ) के “इरामानुसन … Read more

sthOthra rathnam – 57

SrI:  SrImathE SatakOpAya nama:  SrImathE rAmAnujAya nama:  SrImath varavaramunayE nama: Full Series << Previous Introduction In the previous pAsuram, ALavandhAr meditated upon the ultimate state of SEshathvam (servitude) which is thadhIya SEshathvam (servitude towards bhagavAn‘s devotees).  Here, he highlights his aversion towards those which are outside SEshathvam and prays to emperumAn “Kindly eliminate them”. na … Read more

Arththi prabandham – 43

SrI:  SrImathE SatakOpAya nama:  SrImathE rAmAnujAya nama:  SrImath varavaramunayE nama: Full Series << Previous Introduction In the last pAsuram, mAmunigaL used the phrase “irangAy ethirAsA”. This might connote that mAmunigaL is frustrated. A person who want to go to paramapadham needs two things namely (a) the interest to go there and (b) the lack of … Read more

ఆర్తి ప్రబంధం – 17

శ్రీః శ్రీమతే శఠకోపాయ నమః శ్రీమతే రామానుజాయ నమః శ్రీమత్ వరవరమునయే నమః ఆర్తి ప్రబంధం << ఆర్తి ప్రబంధం – 16 ప్రస్తావన పూర్వపు పాశురములో మణవాళమామునులు, శ్రీ రామానుజులవారిని చేరు సుదినము ఎప్పుడు వచ్చునని తెలుపమని ప్రార్ధించెను. ఈ ప్రార్ధనచే శ్రీ రామానుజుల మదిన ఒక ఆలోచన ఉదయించి ఉండవచ్చని మణవాళమామునులు తలచెను. శ్రీ రామానుజుల మదిన ఉదయించిన ఆలోచన ఏమనగా ” ఓ! మణవాళమాముని!, మీరు ఈ భౌతికశరీరమును విడిచినప్పుడు “మరణమానాల్ (తిరువాయ్ … Read more

జ్ఞానసారము

శ్రీః శ్రీమతే శఠకోపాయ నమః శ్రీమతే రామానుజాయ నమః శ్రీమత్ వరవరమునయే నమః aruLALa perumAL emperumAnAr – srIvillipuththUr maNavALa mAmunigaL – vAnamAmalai e-book – https://1drv.ms/b/s!AiNzc-LF3uwyhhf1kZ2AgZd_T-F6 వ్యాఖ్యాన మూలము –   శ్రీమద్ మణవాళ మామునులు యొక్క వ్యాఖ్యానము ఆధారంగా శ్రీ అరుళాళ మామునిగళ్ రచించిన  జ్ఞాన-ప్రమేయ సారమునకు ,శ్రీ అరుళాళ ప్పెరుమాళ్ ఎంబెరుమానార్ల వంశములో అవతరించిన శ్రీవిల్లిపుత్తూర్ శ్రీ.ఉ.వే. శ్రీనివాసా చార్యులచే తమిళములో  సులభ శైలిలో రచింపబడినది ఈ గ్రంథము.  కీర్తి శేషులు … Read more