पूर्वदिनचर्या – श्लोक – ६
श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवर मुनये नमः परिचय श्लोक ५ … Read more
Divya Prabandham
श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवर मुनये नमः परिचय श्लोक ५ … Read more
श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवर मुनये नमः परिचय श्लोक ४ … Read more
श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवर मुनये नमः परिचय श्लोक ३ … Read more
श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवर मुनये नमः परिचय श्लोक २ … Read more
श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवर मुनये नमः परिचय श्लोक १ … Read more
श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवर मुनये नमः परिचय … Read more
श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः शरणागति गद्य << तनियन श्रीनम्पेरुमाल और श्रीरंगनाच्चियार – श्रीरंगम श्रीपेरियवाच्चान पिल्लै के व्याख्यान का मुख्य आकर्षण श्रीरामानुज स्वामीजी ने अपने प्रबंध श्रीभाष्य में मोक्ष (संसार से मुक्ति) प्राप्ति के लिए भक्ति योग की व्याख्या की है। श्रीभाष्य की रचना, कुदृष्टियों (वह जो वेदों का गलत अर्थ करते हैं) … Read more
श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः शरणागति गद्य श्रीरामानुज स्वामीजी – श्रीपेरियवाच्चान पिल्लै श्रीपेरियवाच्चान पिल्लै की तनियन (उनके अद्भुत व्याख्यान के प्रति कृतज्ञता प्रदर्शित करने के लिए यह तनियन प्रस्तुत की गयी है) – श्रीमत कृष्ण समाह्वाय नमो यामुन शूनवे| यत कटाक्षैक लक्ष्याणम् सुलभ: श्रीधरस्सदा || अर्थात: मैं श्रीपेरियवाच्चान पिल्लै स्वामीजी के … Read more
श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः भगवद श्रीरामानुज स्वामीजी ने नौ उत्कृष्ट ग्रंथों की रचना की– श्रीभाष्य, वेदांत सारम, वेदांत दीपम, वेदार्थ संग्रहम, गीता भाष्यम, नित्य ग्रंथ, शरणागति गद्यम, श्रीरंग गद्यम और श्रीवैकुंठ गद्यम। प्रथम तीन ग्रंथ, ब्रह्म सूत्र से सम्बंधित है, चतुर्थ ग्रंथ, वेदांत के कुछ विशिष्ट छंदों से संबंधित है, … Read more
श्री: श्रीमते शठकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमद्वरवरमुनये नम: आर्ति प्रबंध तनियन १ तेन पयिलुम थारान एतिरासन सेवडी मेल * तान परमपत्ति तलैयेडुथ्थु * मानदर्क्कु उणवाग आर्तियुडन ओण्डमिळ्गळ सेईदान * मणवाळ मामुनिवन वंदु * शब्धार्थ : मणवाळ मामुनिवन – पेरिय जीयर , जो मणवाळ मामुनिगळ नाम से भी जाने जाते हैं। वंदु – इस संसार … Read more