ज्ञान सारं – पासुर (श्लोक) १३
श्री: श्रीमते शठकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमत् वरवरमुनये नम: ज्ञान सारं ज्ञान सारं – पासुर (श्लोक) १२ ज्ञान सारं – पासुर (श्लोक) १४ पासुर (१३) पण्डे उयिर् अनैत्तुम् पंगकयत्ताळ् नायगर्के तोण्डम् एनत्तळिन्ड तूमनत्तार्क्कु – उण्डो ? पल कत्तुम् तम् उडम्बैप्पार्तु अबिमानिक्कुम् उलगत्तवरोडु उरवु शब्दार्थ – पण्डे उयिरनैत्तुम् – क्या कर्तव्यनिष्ठ चित जिवात्माए सदैव | … Read more