ज्ञान सारं – पासुर (श्लोक) ३३
श्री: श्रीमते शठकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमत् वरवरमुनये नम: ज्ञान सारं ज्ञान सारं – पासुर (श्लोक) ३२ ज्ञान सारं – पासुर (श्लोक) ३४ पाशुर-३३ एट्ट इरुन्द गुरुवै इवै अन्रेन्रु विट्टोर परनै विरुप्पुरुदल – पोट्टनेत्तन कण सेम्पलित्तिरुन्दु कैत्तुरुत्ति नीर तूवि अम्पुदत्तैप पार्त्तिरुप्पानट्रु प्रस्तावना: इस पाशुर में यह समझाया गया है की कैसे एक व्यक्ति बुद्धिहीन है जो … Read more