आर्ति प्रबंधं – ३०

श्री:  श्रीमते शठकोपाय नम:  श्रीमते रामानुजाय नम:  श्रीमद्वरवरमुनये नम: आर्ति प्रबंधं << पासुर २९   उपक्षेप इस पासुरम में श्री रामानुज के चरण कमलों से प्रारंभित, उनके सिर तक उन्के श्रेय की मंगळम गाते हैं मणवाळ मामुनि ।  . मणवाळ मामुनि को लगता है कि अन्य धर्मों के जनों के सात बहुत वाद करने से श्री … Read more

आर्ति प्रबंधं – २९

श्री:  श्रीमते शठकोपाय नम:  श्रीमते रामानुजाय नम:  श्रीमद्वरवरमुनये नम: आर्ति प्रबंधं << पासुर २८ उपक्षेप परमपद के पथ में आनेवाली बाधाओँ से रक्षण जिन्की आशीर्वाद से साध्य है उन श्री रामानुज के जयों के श्रेय, मणवाळ मामुनि इस पासुरम में गाते हैं। वेदों को तिरस्कार करने वाले तथा वेदों की अर्थों को अनर्थ प्रकट करने वालों … Read more

आर्ति प्रबंधं – २८

श्री:  श्रीमते शठकोपाय नम:  श्रीमते रामानुजाय नम:  श्रीमद्वरवरमुनये नम: आर्ति प्रबंधं << पासुर २७ उपक्षेप नेक और ज्ञान संबन्धित कार्यो में व्यस्त रहने पर भी परमपद की रुचि या इच्छा मणवाळ मामुनि के मन में श्री रामानुज के अनुग्रह से ही उत्पन्न हुई।  श्री रामानुज के इस अत्यंत कृपा को मणवाळ मामुनि इस पासुरम में प्रशंसा … Read more

आर्ति प्रबंधं – २७

श्री:  श्रीमते शठकोपाय नम:  श्रीमते रामानुजाय नम:  श्रीमद्वरवरमुनये नम: आर्ति प्रबंधं << पासुर २६ उपक्षेप पिछले पासुरम में मणवाळ मामुनि, श्री रामानुज से प्रार्थना करते हैं , “ ओळि विसुम्बिल अड़ियेनै ओरुप्पडुत्तु विरैन्दे” अर्थात, परमपद पहुँचने की व्यवहार को शीघ्र ही पूर्ण करें। “वाने तरुवान एनक्काइ”(तिरुवाय्मोळि १०. ८. ५ ) के अनुसार श्री रामानुज मणवाळ मामुनि … Read more

आर्ति प्रबंधं – २६

श्री:  श्रीमते शठकोपाय नम:  श्रीमते रामानुजाय नम:  श्रीमद्वरवरमुनये नम: आर्ति प्रबंधं << पासुर २५ उपक्षेप इस पासुरम में श्री रामानुज के ह्रदय की ज्ञान होने के कारण मणवाळ मामुनि श्री रामानुज के पक्ष में बात करतें  हैं। श्री रामानुज के विचार की ज्ञान मामुनि को हैं और उस भाव को , वे इस पासुरम में प्रकट … Read more

आर्ति प्रबंधं – २५

श्री:  श्रीमते शठकोपाय नम:  श्रीमते रामानुजाय नम:  श्रीमद्वरवरमुनये नम: आर्ति प्रबंधं << पासुर २४   उपक्षेप इस पासुरम में मणवाळ मामुनि एक काल्पनिक प्रश्न उठाते हैं। उनका मानना हैं कि यह शायद श्री रामानुज के मन में होगा और इसका अब मणवाळ मामुनि, इस पासुरम में उत्तर देतें हैं। , श्री रामानुज, मणवाळ मामुनि से (काल्पनिक) … Read more

आर्ति प्रबंधं – २४

श्री:  श्रीमते शठकोपाय नम:  श्रीमते रामानुजाय नम:  श्रीमद्वरवरमुनये नम: आर्ति प्रबंधं << पासुर २३ उपक्षेप साँसारिक संबंध के हटने से, अत्यंत सौभाग्य स्तिथि जो हैं ,परम श्रेयसी आचार्यो के मध्य पहुँचने तक के घटनाओँ की विवरण इस पासुरम में मणवाळ मामुनि प्रस्तुत करते हैं।    पासुरम इंद उडल विटटु इरविमंडलत्तूडु येगी इव्वणडम कळित्तु इडैयिल आवरणमेळ पोय अन्दमिल … Read more

आर्ति प्रबंधं – २३

श्री:  श्रीमते शठकोपाय नम:  श्रीमते रामानुजाय नम:  श्रीमद्वरवरमुनये नम: आर्ति प्रबंधं << पासुर २२ उपक्षेप पिछले दो पासुरों में, मणवाळ मामुनि, अपने आचार्य तिरुवाइमोळिप्पिळ्ळै और परमाचार्य एम्बेरुमानार के आशीर्वाद के विवरण किये। मणवाळ मामुनि के अभिप्राय हैं कि इन्के आशीर्वाद के बल पर वे निश्चित परमपद प्राप्त करेंगें और भगवान की अनुभव करेंगें।  शीघ्र “दिव्यस्थान मण्डप” … Read more

आर्ति प्रबंधं – २२

श्री:  श्रीमते शठकोपाय नम:  श्रीमते रामानुजाय नम:  श्रीमद्वरवरमुनये नम: आर्ति प्रबंधं << पासुर २१ उपक्षेप पिछले पासुरम में मणवाळ मामुनि “एन्न भयं नमक्के”, कहते हैं , अर्थात उन्को अब कोई भय नहीं हैं। अब कहते हैं कि अपने आचार्य तिरुवाइमोळिप्पिळ्ळै के निर्हेतुक आशीर्वाद के कारण श्री रामानुज उन पर गर्व करेंगें। यह इस सँसार के सागर … Read more

आर्ति प्रबंधं – २१

श्री:  श्रीमते शठकोपाय नम:  श्रीमते रामानुजाय नम:  श्रीमद्वरवरमुनये नम: आर्ति प्रबंधं << पासुर १० उपक्षेप यह पासुरम मणवाळ मामुनि और उनके मन के बीच की संभाषण है। उनकी मन का प्रश्न है “हे मणवाळ मामुनि ! पिछले पासुरम में आप परमपद के मार्ग की और श्रीमन नारायण से जीवात्मा की मिलन का भी विवरण दिए। अत्यंत … Read more