आर्ति प्रबंधं – ४६
श्री: श्रीमते शठकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमद्वरवरमुनये नम: आर्ति प्रबंधं << पासुर ४५ उपक्षेप पिछले पासुरम में मामुनि ,आचार्य के महत्त्व कि श्रेय जो गाते हुए उन्हीं के कृपा को अपनी उन्नति की कारण बतातें हैं। इसी विषय कि इस पासुरम में और विवरण देतें हैं। पासुरम ४६ तिरुवाय्मोळि पिळ्ळै तीविनैयोंदम्मै गुरुवागि वंदु उय्यक्कोंडु – … Read more