अष्ट श्लोकी

श्री:
श्रीमते शठकोपाय नम:
श्रीमते रामानुजाय नम:
श्रीमद्वरवरमुनये नम:

namperumal-nachiar_serthi2

parasara-bhattarश्रीपराशर भट्टर

रहस्य त्रय के गहरे अर्थों को प्रकाशित करने के लिए श्री पराशर भट्टर ने अत्यंत कृपापूर्वक अष्ट श्लोकी नामक स्तोत्रमाला की संस्कृत में रचना की। यह रहस्य त्रय को विस्तृत रूप से प्रस्तुत करने वाला पहला प्रबंध है।

न्याय वेदांत विद्वान् दामल वंकीपुरम श्री उ. वे. पार्थसारथि स्वामी ने सरल तमिळ में इस प्रबंध का अनुवाद किया है। हम उस के हिन्दी अनुवाद को यहाँ देखते है।

इन आठ श्लोकों के अलावा इस पबंध के रचयिता श्रीपराशर भट्टर के यश को स्थापित करती वंदन तनियन भी प्रस्तुत है।

इस प्रबंध को आगे निम्न अनुच्छेदों में देखेंगे।

– अडियेन प्रीती रामानुज दासि

आधार:  http://divyaprabandham.koyil.org/index.php/2016/01/ashta-sloki/

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