उपदेश रत्तिनमालै – सरल व्याख्या – पासुर १९ – २०

। ।श्री: श्रीमते शठकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमत् वरवरमुनये नमः। । उपदेश रत्तिनमालै <<पासुर १६ – १८ पासुर १९ उन्नीसवां पासुर। मामुनिगळ् सभी आऴ्वारों के अरुळिच्चेयल् ( सभी दिव्य स्तोत्रों का संग्रह) में से तिरुप्पाल्लाण्डु की महानता को उदाहरण सहित समझाते हैं। कोदिलवाम् आऴ्वार्गळ् कूऱु कलैक्कल्लाम्आदि तिरुप्पाल्लाण्डु आनदवुम् – वेदत्तुक्कुओम् एन्नुम् अदु पोल् उळ्ळदुक्कु … Read more

उपदेश रत्तिनमालै – सरल व्याख्या – पासुर १६ – १८

। ।श्री: श्रीमते शठकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमत् वरवरमुनये नमः। । उपदेश रत्तिनमालै <<पासुर १४ और १५ पासुर १६ सोलहवां पासुर। इस पासुर के साथ शुरू करते हुए अगले पाँच पासुरों में मामुणिगळ्, पेरियाऴ्वार् की श्रेष्ठता का वर्णन करते हैं जो अन्य आऴ्वारों से अधिक महान हैं।  इन्ऱैप् पेरुमै अऱिन्दिलैयो एऴै नेञ्जेइन्ऱैक्कु एन् एट्रम् … Read more

उपदेश रत्तिनमालै – सरल व्याख्या – पासुर १४ और १५

। ।श्री: श्रीमते शठकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमत् वरवरमुनये नमः। । उपदेश रत्तिनमालै <<पासुर १२ और १३ पासुर १४  चौदहवां पासुर। मामुनिगळ् वैकासी (वैशाख) मास के विसागम् (विशाखा) नक्षत्र के महान दिन का जश्न मनाते हैं, जिस दिन नम्माऴ्वार्, जिन्होंने सरल तमिऴ् में वेद के अर्थों का वर्णन किया और जिनके पास अन्य आऴ्वार् … Read more

उपदेश रत्तिनमालै – सरल व्याख्या – पासुर १२ और १३

। ।श्री: श्रीमते शठकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमत् वरवरमुनये नमः। । उपदेश रत्तिनमालै <<पासुर १० और ११ पासुर १२ बारहवा पासुर। इसके बाद वे दयालु रूप से समझाते हैं ताकि दुनिया के सभी लोग उन तिरुमऴिसै आळ्वार् की महानता के बारे में जान जाएँ, जिन्होंने तै (पौष) के महीने में मघम् (मघा) नक्षत्र में … Read more

उपदेश रत्तिनमालै – सरल व्याख्या – पासुर १० और ११

। ।श्री: श्रीमते शठकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमत् वरवरमुनये नमः। । उपदेश रत्तिनमालै <<पासुर ७ – ९ पासुर १०  क्योंकि रोहिणी नक्षत्र कार्तिक नक्षत्र के बाद आता है, इसलिए मामुनिगळ् संसार के लोगों को तिरुपाण् आऴ्वार् की महानता का निर्देश देते हैं, जो कार्तिक महीने के रोहिणी नक्षत्र में अवतीर्ण हुए। रोहिणी एक नक्षत्र … Read more

उपदेश रत्तिनमालै – सरल व्याख्या – पासुर ७ – ९

। ।श्री: श्रीमते शठकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमत् वरवरमुनये नमः। । उपदेश रत्तिनमालै <<पासुर ४ – ६ पासुर ७ सातवाँ पासुर समझाता है कि कैसे उनके ईश्वरीय नाम दुनिया में दृढ़ता से स्थापित किये गए, क्योंकि उन्होंने दुनिया को महानतम लाभ प्रदान किया।  मटृळ्ळ आऴ्वार्गळुक्कु मुन्ने वन्दुदित्तु नट्रमिऴाल् नूल् सेय्दु नाट्टै उय्त्त – पेट्रिमैयोर्एन्ऱु मुदलाऴ्वार्गळ् … Read more

उपदेश रत्तिनमालै – सरल व्याख्या – पासुर ४ – ६

। ।श्री: श्रीमते शठकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमत् वरवरमुनये नमः। । उपदेश रत्तिनमालै << पासुर १ – ३ पासुर ४ चौथे पासुर में मामुनिगळ् ,आऴ्वार् जिस क्रम में अवतरित हुए, उस क्रम को बताया है | पोय्गैयार् भूतत्तार् पेयार् पुगऴ् मऴिसैअय्यन् अरुळ् माऱन् सेरलर् कोन् – तुय्य भट्टनादन् अन्बर् ताळ् दूळि नऱ्पाणन् नऱ्कलियन्ईदु इवर् … Read more

उपदेश रत्तिनमालै – सरल व्याख्या – पासुर १ – ३

। ।श्री: श्रीमते शठकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमत् वरवरमुनये नमः। । उपदेश रत्तिनमालै << तनियन् इस पासुर में मामुनिगळ् अपने आचार्य ( शिक्षक) को प्रणाम करते हैं, और स्पष्ट रूप से इस ग्रंथ को दया पूर्वक रचने के अपने उद्देश्य को बताते हैं।  एन्दै तिरुवाय्मोऴि पिळ्ळै इन्नरुळाल्वन्द उपदेस मार्गत्तैच् चिन्दै सेय्दुपिन्नवरुम् कऱ्क उपदेसमाय्प् पेसुगिन्ऱेन्मन्निय … Read more

उपदेश रत्तिनमालै – सरल व्याख्या – तनियन्

। ।श्री: श्रीमते शठकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमत् वरवरमुनये नमः। । उपदेश रत्तिनमालै मुन्नम् तिरुवाय्मोऴिप्पिळ्ळै ताम् उपदेसित्त नेर्तन्निन् पडियैत् तणवाद सोल् मणवाळ मुनि तन् अन्बुडन् सेय् उपदेस रत्तिन मालै तन्नैत्तन् नेञ्जु तन्निल् दरिप्पवर् ताळ्गळ् शरण् नमक्के यह तनियन् ( एक अकेली स्तुति) जो ग्रंथ में एक अंतर्दृष्टि प्रदान करता है, जो मामुनिगळ् के महत्वपूर्ण … Read more

उपदेश रत्तिनमालै – सरल व्याख्या

। ।श्री: श्रीमते शठकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमत् वरवरमुनये नमः। । अन्य प्रबंध उपदेश रत्तिनमालै एक अद्भुत तमिल ग्रंथ (दिव्य संरचना) है, जिसे दया पूर्वक हमारे मणवाळ मामुनिगळ द्वारा रचित किया गया है। जो “विशधवाक शिखामणि “(एक प्रभावशाली वाणी, और जो मुकुट में जडे आभूषण के समान हैं )। यह एक अद्भुत रचना है … Read more