आर्ति प्रबंधं – ५१
श्री: श्रीमते शठकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमद्वरवरमुनये नम: आर्ति प्रबंधं << पाशुर ५० उपक्षेप एम्पेरुमानार विचार करतें हैं, “ तुम्हें अन्य तुच्छ विषयों के बारे में बात करने की क्या आवश्यकता हैं? इस्से पूर्व तुम्हारी स्थिति क्या थी?”. इस्के उत्तर में मामुनि कहतें हैं, “ मैं भी उन्हीं लोगों के तरह अनादि कालों से … Read more