नाच्चियार् तिरुमोऴि – सरल व्याख्या – बारहवां दशक – मट्रु इरुन्दीर्गट्कु
श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नमः नाच्चियार् तिरुमोऴि << ग्यारहवां दशक आण्डाळ् एम्पेरुमान् के सुवचनों का आश्रय लेती हैं कि वे सर्वरक्षक हैं,पेरियाळ्वार(श्री विष्णुचित्त स्वामी जी)के साथ सम्बन्ध का आश्रय लेती हैं परन्तु इच्छा पूर्ण न होने से(एम्पेरुमान् के दर्शन और प्राप्ति) व्यथित हो गई “एम्पेरुमान् स्वातंत्र्य … Read more