दिव्यप्रबन्धम् – सरल मार्गदर्शक – भाग ७
श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः पूरी श्रृंखला <<भाग ६ आऴ्वार् वे हैं जिन्हें “मयर्वऱ मदिनलम्” (कल्मष-रहित ज्ञान) के कारण दिव्य भक्ति का वरदान प्राप्त हुआ। ऎम्पॆरुमान् (भगवान) के साथ उनका उमड़ता हुआ अनुभव “दिव्यप्रबन्धम्” के रूप में प्रकट हुआ। “दिव्यप्रबन्धम्” वेदों का सार प्रस्तुत करता है। “दिव्यप्रबन्धम्” का उद्देश्य हमें … Read more