चतुः श्लोकी – तनियन

श्रीः
श्रीमते शठकोपाय नमः
श्रीमते रामानुजाय नमः
श्रीमद्वरवरमुनये नमः

चतुः श्लोकी

alavandharआळवन्दारकाट्टुमन्नारकोईल

यत पदाम्भोरुहध्याना विध्वस्थासेष कल्मष: |
वस्तुथामुपयातोहम यामनेयम् नमामितम् ||

Listen

अपने कृपा से मेरे दोषों को निष्कासन कर, एक पेह्चान्नीय वस्तु बनाने वाले श्रीयामुनाचार्य को पूजता हूँ।  अर्थात , मै पहले अचित था और यामुनाचार्य के चरण कमलों पर ध्यान बढ़ाने पर चित (आत्मा) हुआ|

—- यामुनाचार्य के वैभव प्रकट करते हुए स्वामि रामानुज

अडियेन् प्रीती रामानुज दासि

आधार: http://divyaprabandham.koyil.org/index.php/2015/12/chathu-sloki-thaniyan/

archived in http://divyaprabandham.koyil.org

pramEyam (goal) – http://koyil.org
pramANam (scriptures) – http://srivaishnavagranthams.wordpress.com
pramAthA (preceptors) – http://guruparamparai.wordpress.com
srIvaishNava education/kids portal – http://pillai.koyil.org

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *