ज्ञान सारं – पासुर (श्लोक) ३८
श्री: श्रीमते शठकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमत् वरवरमुनये नम: ज्ञान सारं ज्ञान सारं – पासुर (श्लोक) ३७ ज्ञान सारं – पासुर (श्लोक) ३९ पाशुर-३८ तेनार कमलत् तिरुमामगल कोलुनन ताने गुरुवागित तन अरूलाल – मानिडर्क्का इन्निलत्ते तो न्रु दलाल यार्क्कुम अवन तालिणैयै उन्नुवदे साल उरुम प्रस्तावना: “आचार्य कि कीर्ति और महत्व” का मनोभाव २६वें पाशुर (तप्पिल गुरू … Read more