periyAzhwAr thirumozhi – vyAkhyAna avathArikai (Introduction to the Commentary)

SrI: SrImathE SatakOpAya nama: SrImathE rAmAnujAya nama: SrImadh varavara munayE nama: periyAzhwAr thirumozhi Previous emperumAn is the consort of SrI mahAlakshmi; he does not have any unfulfilled desires; he is the repository of all the auspicious qualities; he is the protector of all. Such sarvESvaran (one who controls all the others) with his consorts atop … Read more

periyAzhwAr thirumozhi – thaniyans

SrI: SrImathE SatakOpAya nama: SrImathE rAmAnujAya nama: SrImadh varavara munayE nama: periyAzhwAr thirumozhi There are three thaniyans for periyAzhwAr thirumozhi, one in samskrutham and two in thamizh. thaniyan 1 This thaniyan, in samskrutham, was mercifully composed by SrIman nAthamunigaL. gurumukham anadhIthya prAha vEdhAn aSEshAn    narapathi parikluptham Sulkam AdhAthu kAma: lSvaSuram amaravandhyam ranganAthasya sAkshAth    dhvijakula thilakam … Read more

periyAzhwAr thirumozhi

SrI: SrImathE SatakOpAya nama: SrImathE rAmAnujAya nama: SrImadh varavara munayE nama: periyAzhwAr vaibhavam periyAzhwAr was born in SrivillipuththUr, to mukundha bhattar and padhmA ammangAr, in krOdhana year, ninth day of mithuna mAsam (Ani), Sukla paksha EkAdhasi thithi (11th day after full moon) on a Sunday, in swAthi nakshathram, as the amSam (having the features of) … Read more

नाच्चियार् तिरुमोऴि- सरल व्याख्या – चौदहवां तिरुमोऴि – पट्टि मेय्न्दोर्

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नमः नाच्चियार् तिरुमोऴि << तेरहवां दशक तिरुप्पावै में, आण्डाळ् ने प्राप्यम् (अन्तिम उपेय) और प्रापकम् (प्राप्ति का उपाय) की घोषणा की थी। अंतिम लक्ष्य नहीं मिलने पर वह असमंजस में पड़ गई और नाच्चियार् तिरुमोऴि में प्रथम कामन् के चरणों में गिर गई। … Read more

नाच्चियार् तिरुमोऴि – सरल व्याख्या – तेरहवां दशक – कण्णन् ऎन्नुम् करुम् दॆय्वम्

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नमः नाच्चियार् तिरुमोऴि << बारहवां दशक जो लोग इसकी इस दशा देखते, वे अत्यंत दुखी होकर यदि इसे कहीं ले जाने को चाहते तो स्वयं को उसके लिए भी बलहीन अनुभव करते। यदि वे बड़ा प्रयास करते, तो इसे कृपापूर्वक एक पर्यङ्क … Read more

नाच्चियार् तिरुमोऴि – सरल व्याख्या – बारहवां दशक – मट्रु इरुन्दीर्गट्कु

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नमः नाच्चियार् तिरुमोऴि << ग्यारहवां दशक आण्डाळ् एम्पेरुमान् के सुवचनों का आश्रय लेती हैं कि वे सर्वरक्षक हैं,पेरियाळ्वार(श्री विष्णुचित्त स्वामी जी)के साथ सम्बन्ध का आश्रय लेती हैं परन्तु इच्छा पूर्ण न होने से(एम्पेरुमान् के दर्शन और प्राप्ति) व्यथित हो गई “एम्पेरुमान् स्वातंत्र्य … Read more

नाच्चियार् तिरुमोऴि – सरल व्याख्या – ग्यारहवां दशक – ताम् उगक्कुम्

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नमः नाच्चियार् तिरुमोऴि << दसवां तिरुमोऴि भगवान कभी अपना वचन नहीं त्यागेंगे; वे सदा हमारी रक्षा करेंगे। गोदा देवी (आण्डाळ्) दृढ़ थी कि यदि यह भी असफल होने पर भी वे हमें इसलिए शरण देंगे क्योंकि हम श्रीविष्णुचित्त (पेरियाऴ्वार्) की दिव्य पुत्री … Read more

नाच्चियार् तिरुमोऴि – सरल व्याख्या – दसवां तिरुमोऴि – कार्क्कोडल् पूक्काळ्

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नमः नाच्चियार् तिरुमोऴि << नौंवा तिरुमोऴि प्रारंभ में वह स्वयं को बनाए रखने के लिए कामदेव, पक्षियों और मेघों के चरणों को पकड़ती है। इससे उसका‌ कोई लाभ नहीं हुआ। यद्यपि भगवान नहीं आए, उसने सोचा कि वह भगवान से संबंधित वस्तुओं … Read more

नाच्चियार् तिरुमोऴि – नौंवा तिरुमोऴि – सिन्दुरच् चॆम्बॊडि

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नमः नाच्चियार् तिरुमोऴि << आठवां तिरुमोऴि आठवें दशक में आण्डाळ् (गोदाम्बा) दुःखी थी अर्थात उसके अस्तित्व पर प्रश्नचिन्ह लगा था। वहाँ कुछ मेघ थे भगवान के पास जाकर इसकी दशा के बारे में बताने। परंतु वे कहीं नहीं ग‌ए, और पूरा जल … Read more

नाच्चियार् तिरुमोऴि – सरल व्याख्या – आठवां तिरुमोऴि – विण्णील मेलाप्पु

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नमः नाच्चियार् तिरुमोऴि <<सातवां तिरुमोऴि इसके‌ पूर्व के दशक में वह पाञ्चजन्य आऴ्वान् से भगवान श्रीमन्नारायण (एम्पेरुमान्) के अधरामृत के स्वरूप के विषय में पूछती है। उससे पूछताछ करने के पश्चात आण्डाळ् के हृदय का अनुभव भगवान तक पहुँच जाता है। उसी … Read more