तिरुप्पळ्ळियेळुच्चि- सरल व्यख्या

श्रीः  श्रीमते शठःकोपाय  नमः   श्रीमते रामानुजाय  नमः   श्रीमत् वरवरमुनये नमः मुदलायिरम् श्री मणवाळ मामुनिगळ् अपनी उपदेश रत्नमालै के ११ वे पाशुर में तोण्डरडिप्पोडि आळ्वार् (भक्तांघ्रिरेणू आळ्वार्) के बारे मैं बहुत ही सुन्दर ढंग से बतला रहे है । “मन्निय सीर् मार्गळियिल् केटै इन्ऱु मानिलत्तीर् एन्निदन्क्कु एट्रम् एनिल् उरैक्केन् – तुन्नु पुगळ् मामऱैयोन् तोण्डरडिप्पोडि … Read more

तिरुवाय्मोळि – सरल व्याख्या – तनियन

श्री: श्रीमते शटकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमत वरवरमुनये नम: कोयिल तिरुवाय्मोळि भक्तामृतं विश्वजनानुमोदनम सर्वार्थदम श्री शटकोप वांग्मयम | सहस्र शाकोपनिषद समागमम नमाम्यहम द्राविड़ वेद सागरं || तिरुवाय्मोळि जो श्रीमन नारायण के भक्तों को अमृत समान है , जो सबको आनंद देने वालि है , जो सबको सारे मंगलमय फल देने वालि हैं, जो साम … Read more

कोयिल तिरुवाईमोळी – सरल व्याख्या

श्री: श्रीमते शटकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमत वरवरमुनये नम:  तिरुवाईमोळी उपदेशरत्न मालै के १५वे पासुरम में श्री मणवाळ मामुनिगळ वैकासि विसागम, नम्माळ्वार, तिरुवाईमोळी और तिरुक्कुरुगूर के वैभवों को विशिष्ट रूप में चित्रित करतें हैं.  उंडो वैकासि विसागत्तुक्कु ओप्पोरु नाळ उंडो सडगोपर्कोप्पोरूवर – उंडों तिरुवाईमोळीक्कोप्पु  तेनकुरुगैकुंडो  ओरु पार तनिल ओक्कुम ऊर  सर्वेश्वर श्रीमन नारायण के … Read more

कण्णिनुण् चिऱुत्ताम्बु – सरल व्याख्या

। । श्रीः  श्रीमते शठःकोपाय नमः  श्रीमते रामानुजाय नमः  श्रीमत् वरवरमुनये नमः । । मुदलयिरं नम्माळ्वार् और् मधुरकवि आळ्वार् श्री मणवाळ मामुनिगळ् अपनी उपदेश रत्न मालै के २६ वे पाशुर में “कण्णिनुण् चिऱुत्ताम्बु” का महत्त्व बतला रहे है । वाय्त्त तिरुमन्दिरत्तिन् मद्दिममाम् पदम्पोल् सीर्त्त मदुरकवि सेय् कलैयै – आर्त्त पुगळ्। आरियर्गळ् तान्गळ् अरुळिच् चेयल् नडुवे सेर्वित्तार् ताऱ्परियम् तेर्न्दु । । हमारे श्रीसम्प्रदाय का तिरुमंत्र (अष्टाक्षर) मंत्र, अपने आप में सम्पूर्णता … Read more

तिरुप्पल्लाण्डु – सरल व्याख्या

।।श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमते वरवरमुनये नमः।। मुदलायिरम् श्री मणवाळ मामुनिगळ् ने अपनी उपदेश रत्नमालै के १९ वे पाशुर में तिरुप्पल्लाण्डु की महत्ता बहुत ही सुन्दर ढंग से समझायी है। पशुराम    १९ . कोदिलवाम् आळ्वार्गळ् कूऱु कलैक्केल्लाम् आदि तिरुप्पल्लाण्डु आनदुवुम् – वेदत्तुक्कु। ओम् एन्नुम्म् अदुपोल् उळ्ळदुक्केळ्ळाम् सुरुक्काय्त् तान् मन्गलम् आनदाल्।। श्री … Read more

शरणागति गद्य – चूर्णिका 8-9

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नम: शरणागति गद्य << चूर्णिका 7 चूर्णिका 8 और 9 लघु है, इसीलिए हम इन्हें साथ में देखेंगे। प्रथम चूर्णिका 8: अवतारिका (भूमिका) चूर्णिका 7 श्रवण करने पर भगवान श्रीरामानुज स्वामीजी से पूछते है, “क्या में मात्र आपके लिए ही पिता, माता, संबंधी आदि हूँ?”, जिसके प्रति उत्तर … Read more

शरणागति गद्य – चूर्णिका 7

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नम: शरणागति गद्य << चूर्णिका 6 – भाग 6 अवतारिका (भूमिका) जैसा की पिछले चूर्णिका में बताया गया है, श्री पेरियवाच्चान पिल्लै प्रश्न करते है कि क्या हमारे द्वारा त्याग किया सभी कुछ हमारे लिए हानि नहीं है। वे प्रतिउत्तर में कहते है कि यह हानि नहीं है … Read more

आर्ति प्रबंधं – ६०

श्री:  श्रीमते शठकोपाय नम:  श्रीमते रामानुजाय नम:  श्रीमद्वरवरमुनये नम: आर्ति प्रबंधं << पाशुर ५९ उपक्षेप आर्ति प्रबंधं के इस अंतिम पासुरम में मामुनिगळ विचार करतें हैं, “ हमें अपने लक्ष्य के विषय में और क्यों तृष्णा हैं? पेरिय पेरुमाळ से श्री रामानुज को सौंपें गए सर्वत्र, श्री रामानुज के चरण कमलों में उपस्थित उन्के सारे … Read more

आर्ति प्रबंधं – ५७

श्री:  श्रीमते शठकोपाय नम:  श्रीमते रामानुजाय नम:  श्रीमद्वरवरमुनये नम: आर्ति प्रबंधं << पाशुर ५६ उपक्षेप मामुनिगळ इस पासुरम में श्री रामानुज के एक काल्पनिक  प्रश्न कि उत्तर प्रस्तुत करतें हैं। श्री रामानुज के प्रश्न:” हे मामुनि! हम आपके विनम्र प्रार्थनाओं को सुनें। आप किस आधार पर , किसके सिफ़ारिश पर मुझें ये प्रार्थना कर रहें … Read more

आर्ति प्रबंधं – ५३

श्री:  श्रीमते शठकोपाय नम:  श्रीमते रामानुजाय नम:  श्रीमद्वरवरमुनये नम: आर्ति प्रबंधं << पाशुर ५२     उपक्षेप पिछले पासुरम में मामुनि अपने अंतिम दिशा को वर्णन करते समय, पेरिय पेरुमाळ के गरुड़ में सवार उन्के (मामुनि को दर्शन देनें) यहाँ आने की बात भी बताया। इससे यह प्रश्न उठता है कि अपने अंतिम दिशा पर … Read more