अष्ट श्लोकी – तनियन

श्री:
श्रीमते शठकोपाये नम:
श्रीमते रामानुजाय नम:
श्रीमद्वरवरमुनये नम:

अष्टश्लोकी

azhwan-bhattar-srirangamश्रीकुरेश स्वामीजी और श्रीपराशर भट्टर – श्रीरंगम

श्री पराशर भट्टार्य श्रीरंगेश पुरोहित: ।
श्रीवत्सांग सुत : श्रीमान् श्रेयसे मेस्तु भुयसे ।।

श्री रंगनाथ भगवान के पुरोहित और श्रीवत्सांग (श्रीकुरेश स्वामीजी) के पुत्र, श्रीपराशर भट्टर जो दिव्य गुण संपत्ति से परिपूर्ण है, वे मुझे श्रेय प्रदान करे।

– अडियेन प्रीती रामानुज दासि

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